अमेरिका में वर्षों बाद किसी महिला को मौत की सजा दी गई है।

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लीजा मैरी मोंटगोमरी ने वर्ष 2004 में एक गर्भवति महिला का पेट काटकर उसके बच्‍चे को अगवा कर
लिया था। उसको इस घृणित अपराध का दोषी ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट निचली अदालत के दिए सजा ए
मौत के फैसले को सही पाया है। उसको पहले जहरीले इंजेक्‍शन से सजा देने के लिए 8 दिसंबर 2020
का दिन तय किया गया था। लेकिन ऊपरी कोर्ट में हुई अपील की वजह से ऐसा नहीं हो सका। 67 वर्षों
में मौत की सजा पाने वाली लीजा पहली महिला हैं। इसके अलावा अमेरिका में 54 और महिलाओं को भी
विभिन्‍न अदालतों से मौत की सजा मिली हुई है।

आपको बता दें कि अमेरिका में सबसे पहले फाइरिंग स्‍कड के माध्‍यम से दोषियों को मौत की सजा दी
जाती थी। इसके बाद इसमें कई बार बदलाव किया गया। इसके तहत दोषी को फांसी के फंदे पर लटकाकर,
जहरीले गैस चैंबर में बिठाकर, हाईवोल्‍टेज करंट देने वाली इलेक्ट्रिक चेयर पर हाथ पांव बांधकर बिठाकर
मौत की सजा दी जाने लगी। इन सभी के बाद जहरीला इंजेक्‍शन लगातर दोषी को मौत की सजा दी जाने
लगी। 1890 में पहली बार इलेक्ट्रिक चेयर के जरिए विलियम केमलर को मौत की सजा दी गई थी। वहीं
1982 में टेक्‍सास में पहली बार जहरीला इंजेक्‍शन देकर चार्ल्‍स ब्रुक्‍स को मौत की सजा दी गई थी। 1924
में नवादा में पहली बार जी जॉन को गैस चैंबर के जरिए मौत दी गई थी।

अमेरिकी इतिहास में पहली बार सन 1632 में किसी महिला को कानूनन मौत की सजा दी गई थी। इस
महिला का नाम जेन चेंपियन था। लेकिन उस वक्‍त अमेरिका में मौत की सजा देने का तरीका आज की
तरह नहीं था। आज जहां जहरीला इंजेक्‍शन देकर मौत की सजा दी जाती है वहीं उस वक्‍त ये फांसी देकर
दी जाती थी। उसको शिशु हत्‍या का दोषी ठहराते हुए ये सजा सुनाई गई थी। 17 वीं और 18 वीं शताब्दी
की शुरुआत में लगभग दो-तिहाई महिलाओं को बाल हत्या का दोषी ठहराया गया था। जेन के साथ उसके
प्रेमी को बाल हत्‍या का दोषी ठहराया गया था और उसको भी फांसी ही दी गई थी।