एंकिलॉजि़ग स्पॉण्डिलाइटिस चलना-फिरना बंद करवा सकता है

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एंकिलॉजि़ग स्पॉण्डिलाइटिस चलना-फिरना बंद करवा सकता है

40 साल की उम्र के बाद स्त्रियों को इसके प्रति सचेत हो जाना चाहिए। सही समय पर उपचार न कराने पर यह समस्या

गंभीररूप ले लेती है। और पीड़ित व्यक्ति चलने-फिरने में असमर्थ हो जाता है।

समस्या की वजहें

अभी वैज्ञानिकों द्वारा इस पर रिसर्च किया जा रहा है। वैसे आनुवंशिकता को इसकी प्रमुख वजह माना जाता है क्योंकि

एएस के ज्यादातर रोगियों में एचएलए-बी 27 नामक एक जीन समान रूप से पाया जाता है, जिसके आधार पर साइंटिस्ट

इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि आनुवंशिकता इस बीमारी की

प्रमुख वजह हो सकती है।

इसके लक्षण 

एंकिलॉजि़ंग स्पॉण्डिलाइटिस होने पर मरीज़ की कमर, हिप्स और थाइज़ में हमेशा अकडऩ और तेज़ दर्द होता है। शरीर

के इन हिस्सों में सूजन भी हो सकती है। सुबह के वक्त या लगातार लंबे समय तक बैठकर काम करने के बाद भी ऐसी

समस्या देखने को मिलती है। आमतौर ऐसे लक्षण लगभग 35-40 साल की उम्र में नज़र आने लगते हैं। यह दर्द इतना तेज़

होता है कि इसकी वजह से रोज़मर्रा की दिनचर्या बाधित होने लगती है और आराम करने के बाद भी उन्हें इससे राहत

नहीं मिलती।

इससे बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान

अपने भोजन में कैल्शियम, प्रोटीन,विटमिन और मिनरल्स को प्रमुखता से शामिल करें। आमतौर पर मिल्क प्रोडक्ट्स,

फल, हरी सब्जि़यों, ड्राई फ्रूट्स, अंडा, चिकेन और मछली से शरीर को इन आवश्यक तत्वों का पोषण मिल जाता है।

कुकिंग के दौरान घी, तेल, मैदा और चीनी का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करें।नियमित एक्सरसाइज़ और वॉक से बढ़ते

वज़न को नियंत्रित रखें।जब भी पीठ में दर्द हो तो उसे मामूली समस्या समझकर अपने आप दवा लेने की गलती न करें।

ऐसी स्थित में किसी हड्डी रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।