कक्षाओं में जगह कम,स्कूल प्रबंधन के लिए होगी कड़ी चुनौती

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केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में स्कूल खोलना प्रशासन और शिक्षा विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा।

सरकार ने जम्मू संभाग के समर जोन के स्कूलों को एक फरवरी से खोलने का फैसला किया है। एक फरवरी से नौवीं कक्षा

से लेकर बारहवीं कक्षा तक के स्कूल खोले जाएंगे और आठ फरवरी से ऐलीमेंटरी शिक्षा के स्कूल भी खोल दिए जाएंगे।

ऐलीमेंटरी कक्षाओं के लिए स्कूल खोलने के फैसला काफी अहम होगा क्योंकि इसमें छोटे बच्चों को स्कूल जाना होगा।

हालांकि स्कूल खोलने के लिए एसओपी जारी तो की गई है लेकिन जमीनी हकीकत पर लागू करना आसान नहीं होगा।

चाहे सरकारी स्कूल हों या प्राइवेट स्कूल, कहीं पर भी कक्षाओं में इतनी जगह नहीं है कि बच्चों को दो मीटर की दूरी पर

बिठाया जा सके। इतना ही नहीं छोटे बच्चों के लिए दिशा निर्देशों का पालन करना काफी कठिन होगा। जब स्कूलों में छुट्टी

होती है तो बाहर बढ़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों के लिए स्कूल लेने आते है।

हालांकि कोरोना की वैक्सीन आ चुकी है लेकिन अभी तक हेल्थ वर्करों को ही लगाई जा रही है। यह भी सही है कि पढ़ाई

को पटरी पर लाने के लिए स्कूलों को खोला जाना है क्योंकि दस महीने से अधिक समय से स्कूल बंद पड़े हुए हैं लेकिन

इसके लिए जागरूकता फैलाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत होगी। अभिभावक अभी तक अपने बच्चों

को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं है। अभिभावक कह रह है कि सरकार को चरणबद्ध तरीके से पहले विश्वविद्यालय,

फिर कालेज और उसके बाद स्कूल खोले जाने चाहिए। अभिभावकों का कहना है कि सरकार को स्कूलों को यह भी निर्देश

देने चाहिए कि पहले रोस्टर बनाया जाए। आधे आधे बच्चों को सिलसिलेवार तरीके से बच्चों को बुलाया जाए।