कोरोना वैक्सीन में सबसे पहले आत्मनिर्भर बनकर भारत ने पिछले दिनों में अपने देश में बनी वैक्सीन को पड़ोसी देशों में भेजकर दुनिया के सामने अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है।

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अमेरिका की बाइडन सरकार ने कार्यभार संभालने के तुरंत बाद कोरोना महामारी से निपटने का काम
शुरू कर दिया है। अमेरिका की नई सरकार भारत की मोदी सरकार की वैक्सीन डिप्लोमेसी की मुरीद
हो गई है। अमेरिका ने कहा है कि भारत सच्चा मित्र है, जिसने फार्मास्यूटिकल सेक्टर के माध्यम से
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की कोरोना महामारी में तुरंत मदद शुरू की। भारत ने कई देशों को उपहार में
वैक्सीन देने का जो काम शुरू किया है, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए, कम है।

कोरोना वैक्सीन में सबसे पहले आत्मनिर्भर बनकर भारत ने पिछले दिनों में अपने देश में बनी वैक्सीन
को पड़ोसी देशों में भेजकर दुनिया के सामने अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। भारत ने भूटान,
मालद्वीव, नेपाल, बांग्लादेश, म्यां्मार, मारीशस और सेशेल्स को उपहार स्वरूप वैक्सीन की खेप भेजी
हैं। इसके साथ ही कुछ देशों सउदी अरब, साउथ अफ्रीका, ब्राजील और मोरक्को जैसे देशों से वैक्सीन
के व्यापारिक समझौते भी हुए हैं। अभी श्रीलंका और अफगानिस्तान को भी वैक्सीन भेजी जानी है। भारत
ने देश में कोविशील्ड और कोवैक्सीन का व्यापक पैमाने पर उत्पादन शुरू कर पूरे विश्व में आत्मनिर्भरता
सिद्ध की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं कि भारत के वैक्सीन उत्पादन और वितरण का फायदा
दुनियाभर में मानवता के लिए किया जाएगा।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के दक्षिण और सेन्ट्रल एशिया ब्यूरो ने कहा कि भारत का यह कार्य अंतरराष्ट्रीय
स्तर पर स्वास्थ्य के मामले में बेहद प्रशंसनीय है। भारत ने सिद्ध कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय
का सच्चा मित्र है।

अमेरिकी संसद की विदेशी मामलों की समिति के चेयरमैन ग्रेगरी मीक्स ने महामारी में पड़ोसी देशों की
मदद करने की सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत ने कोरोना महामारी के बीच पड़ोसी देशों को फ्री
वैक्सीन उपलब्ध कराकर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस समस्या के समाधान का रास्ता साफ किया
है।