जानें मोटापा कैसे बढ़ा रहा है गंभीर कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा

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जानें मोटापा कैसे बढ़ा रहा है गंभीर कोरोना वायरस संक्रमण का ख़तरा

महामारी के इस दौर में कई ऐसे शोध सामने आए, जिसमें देखा गया कि कई बीमारियों, जिसमें मोटापा भी शामिल है, में

कोविड-19 का जोखिम ख़तरनाक स्तर पर बढ़ जाता है। यहां तक कि ये जानलेवा भी साबित हो सकता है।

जितना ज़्यादा वज़न, उतना ज्यादा ख़तरा

ज़्यादा वज़नी लोगों में सामान्य मोटे लोगों के मुकाबलें मौत का खतरा ज्यादा था। ज़्यादा वजनी होने का मतलब है कि

आपके शरीर के अंगों पर पहले से ही दबाव है। शोधकर्ताओं ने 2,466 रोगियों के डेटा का विश्लेषण किया जो गंभीर

रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस इन्फेक्शन की वजह से हॉस्पिटल में भर्ती थे। आश्चर्य से यह देखा गया कि 65 साल से

छोटे लोगों में मोटापे की समस्या ज्यादा थी।

अनहेल्थी प्रोसेस्स्ड और पोषक तत्व घने खाद्य पदार्थों की खपत में वृद्धि और शारीरिक कामकाज में कमी होने के कारण

पिछले 50 सालों में दुनिया भर में एक मोटापे की महामारी फैल गई है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2016 में 18 वर्ष और

उससे अधिक उम्र के 1.9 बिलियन से अधिक वयस्क (एडल्ट) मोटापे से पीड़ित थे। इनमें से कम से कम 650 मिलियन

लोग बहुत ज्यादा मोटे थे। वास्तव में 1975 और 2016 के बीच दुनिया भर में मोटापा लगभग तीन गुना बढ़ा है।

हर दिन 50 मिनट तक सुरक्षित फिजकल एक्टिविटी करें और यह ध्यान रखें कि पब्लिक, जिम और ग्रुप वर्कआउट सेशन

न करें।

साइकिल चलाना और टहलना सबसे सुरक्षित आउटडोर एक्सरसाइज हैं। ये फेफड़ों की क्षमता में भी वृद्धि करते हैं।

हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और जैसे कार्डियोवस्कुलर बीमारी में साइकिल चलाने से लाभ होता है रोज की एक्टिविटी जैसे

कि काम पर जाने के लिए, किराना से सामान लाने के लिए साइकिल चलायें और पैदल चलें।