पीवी सिंधु ने प्रो वॉलीबॉल लीग को लेकर कही ‘बड़ी बात’

0
10

भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु के माता-पिता (विजया सिंधु और पीवी रमन्ना) इस खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक टीम की नुमाइंदगी करते रहे, लेकिन ये भी सच है कि उन्हें भी बड़ी पहचान सिंधु के ज़रिये ही हासिल हो पाई

नई दिल्ली:

दो दिनों बाद कोच्चि और चेन्नई में पहली प्रो-वॉलीबॉल लीग शुरू होगी जिसे लेकर इस खेल के चाहने वालों में थोड़ी बेताबी तो है, लेकिन इस खेल से जुड़े अधिकारी अब भी बाक़ी लीगों की तुलना में इसे लोकप्रिय बनाने की ज़ोर-शोर से कोशिश करते नहीं दिख रहे. फिर भी खिलाड़ी और आयोजक इसके हिट होने की उम्मीद कर रहे हैं. भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु भी लीग को लेकर बहुत ही ज्यादा उत्साहित हैं. कोच्चि और चेन्नई में हो रहे इस टूर्नामेंट में चार ओलिंपयन हिस्सा ले रहे हैं. इनमें दो अमरीका, एक कनाडा और लाटविया के एक खिलाड़ी ने अपनी जगह बनाई है. अमरीका के डेविड ली गोल्ड मेडल विजेता खिलाड़ी हैं, जिनके साथ खेलने को लेकर भारतीय खिलाड़ी ख़ासे उत्साहित नज़र आ रहे हैं. इसके अलावा रुडी वेरहॉफ़ (कनाडा), रुस्लान सोरोकिन्स (लैटविया), पॉल लोटमैन (अमरीका) जैसे खिलाड़ियों के आने से लीग की रौनक बढ़ गई है.

जम्मू कश्मीर के पुंछ इलाके से आये सक़लैन तारिक कहते हैं,

डेविड ली जैसे सुपरस्टार के आने से भारतीय खिलाड़ियों को बहुत फ़ायदा होने वाला है.

” वहीं जकार्ता एशियाड में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय टीम के दीपेश सिन्हा कहते हैं,

विदेशी खिलाड़ियों के होने से हमारी तकनीक भी बेहतर होगी.

ये भारतीय वॉलीबॉल के लिए बड़ा मौक़ा है. भारत में पहली बार हो

रही प्रो-वॉलीबॉल लीग के लगातार दिखाये जा रहे प्रोमोशनल वीडियो में आप शायद किसी भी खिलाड़ी को ना पहचानें.

मगर इनके उम्दा खेल से आप ज़रूर प्रभावित होंगे. दुनिया में फ़ुटबॉल के बाद सबसे ज़्यादा इसी खेल के खिलाड़ी हैं.

दुनिया भर में क़रीब 1 अरब लोग इस खेल से जुड़े हैं और इसलिए खिलाड़ी

और आयोजक इससे बड़ी उम्मीदें लगा रहे हैं.

भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु के माता-पिता (विजया सिंधु और पीवी रमन्ना) इस खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक टीम की नुमाइंदगी करते रहे, लेकिन ये भी सच है कि उन्हें भी बड़ी पहचान सिंधु के ज़रिये ही हासिल हो पाई.

शायद बहुत कम लोग जानते हों कि पीवी सिंधु के पिता

पीवी रमनन्ना ने 1986 के सिओल एशियाड में भारतीय टीम के साथ कांस्य पदक जीता था.

इस लीग को लेकर बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु बेहद उत्साहित हैं.

वो कहती हैं, “यकीनन इस लीग की ज़रूरत थी. इससे इस खेल को ज़रूर फ़ायदा होना चाहिए.”

हिन्दुस्तान के हर गली-मुहल्ले में इस खेल को खेलने वाले और इसके पारखी आपको ज़रूर मिल जाएंगे.

लेकिन इस खेल संघ से जुड़े अधिकारी इसे लोकप्रिय नहीं बना सके. शायद इसलिए नई लीग को लेकर इन खिलाड़ियों में अलग उत्साह है.

ग़ाज़ियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन इलाके में इन दिनों वॉलीबॉल लीग के इंतज़ार में

कई लोगों ने मुहल्ले में टीमें बनाकर टूर्नामेट का आयोजन शुरू कर दिया है.

इन्हीं में खलने वाले एक खिलाड़ी रोहित कहते हैं, “क्रिकेट, हॉकी, कबड्डी जैसी लीग आ गई थी.

यही एक लीग बाक़ी रह गई लगती थी.” तो एक और वॉलीबॉल प्रेमी एके राय कहते हैं,

“ये गांव से लेकर शहरों तक पूरे भारत में खेला जाता है.

टीवी पर दिखेगा तो ये खेल चमकने लगेगा.” इस टूर्नामेंट में शिरकत कर रहे विक्रम कहते हैं,

“मैं अपनी परीक्षा की भी परवाह नहीं करता. इस खेल का अलग नशा है.

लीग के मैच टीवी पर देखेंगे तो नशा और बढ़ेगा.” पहली दफ़ा प्रो वॉलीबॉल लीग का आयोजन सिर्फ़ दो शहरों में हो रहा है. लेकिन खिलाड़ियों की उम्मीदें इससे छोटी हुई हों ऐसा नहीं नज़र आता.  इस खेल में लोकप्रिय बनने की सभी जायज़ वजहें हैं. अगर पहले सीज़न फ़ैन्स ने इसे सराहा तो इसकी लोकप्रियता इस खेल को नये मुकाम हासिल करवा सकती है.

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here