रोमांच की सैर को यहां चले आइए, रंग-बिरंगे फूलों के साथ हिमखंडों का होगा दीदार …

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विश्व धरोहर फूलों की घाटी की सैर इस बार पर्यटकों के लिए किसी यादगार से कम नहीं।

घाटी को जाने वाले रास्ते में अब भी छह विशालकाय हिमखंड मौजूद हैं और जून आखिर तक इनके पिघलने के

आसार नहीं हैं।

ऐसे में पर्यटकों के लिए इनके बीच से गुजरना अपने आप में अलौकिक अनुभव होगा।

एक ओर रंग-बिरंगे फूल तो दूसरी ओर दूध से सफेद बर्फीले पहाड़।

चमोली जिले में समुद्रतल से 12 हजार 995 फीट की ऊंचाई पर 87.5 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली फूलों की घाटी

एक जून को पर्यटकों के लिए खुल चुकी है।

घांघरिया से आगे अभी भी छह स्थानों पर विशालकाय हिमखंड सम्मोहन बिखेर रहे हैं, जो माह भर नहीं पिघलेंगे।

बामणधौड़, स्यूचंद, मैरी की कब्र, पुष्पगंगा, द्वारीपुल व नागताल में बने इन हिमखंडों को काटकर फूलों की घाटी के

लिए राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ने सुरक्षित राह निकाली है।

पर्यटक हिमखंडों के बीच से बनी इसी राह से होकर घाटी के दीदार को पहुंच रहे हैं।

यह अपने आप में कभी न भूलने वाला अनुभव है।

वर्ष 1982 में फूलों की घाटी को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया, जबकि यूनेस्को ने वर्ष 2005 में इसे विश्व

धरोहर घोषित किया।

फूलों की घाटी नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान का ही एक हिस्सा है।

यह वही घाटी है, जिसका जिक्ररामायण और महाभारत में नंदकानन नाम से हुआ है।

फूलों की घाटी एक जून से 31 अक्टूबर तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है।

घाटी की रंगत जुलाई से सितंबर के बीच ही निखरती है।

इस दौरान घाटी का सौंदर्य अपने पूरे शबाब पर होता है और ओर से छोर तक खिले रंग-बिरंगे फूल

अद्भुत सम्मोहन बिखेरते हैं।

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