वादों से मुकरी छत्तीसगढ़ सरकार, राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों को लेकर किया था यह बड़ा वादा ….

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शासकीय नौकरी का सपना दिखाकर कमार बच्चों का रूख शासन ने जंगल से स्कूल की ओर करवाकर पढ़ाई-लिखाई करवाई।

12वीं पास होकर जब 100 से अधिक युवा नौकरी के काबिल हुए तो नियम बदल गया और नौकरी देने का प्रावधान ही

खत्म हो गया। अब कमारों को शासन से मिली जमीन पर हल चलाकर खेती किसानी करनी पड़ेगी।

वर्तमान में अनुसूचित जनजाति वर्ग के आरक्षण का लाभ उन्हें मिलेगा।

धमतरी जिले में राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र कहलाने वाले अति अथवा विशेष पिछड़ी जनजाति कमारों के 600 परिवार निवासरत है।

इनकी आबादी 2300 है। ये जंगलों में रहना पसंद करते हैं। गांव में भी रहते हैं तो बस्ती से दूर अपनी झोपड़ियां बनाकर

अलग-थलग रहते हैं। कुछ साल पहले शासन ने कमार परियोजना के तहत इनके विकास के लिए कई कदम उठाए।

जब जनसंख्या बढ़ी और इन परिवारों के जीवनशैली में कुछ सुधार हुआ।

कमार जनजाति के लोगों को प्रेरित करते हुए कुछ साल पहले उनके बच्चों का जंगल से मोहभंग कर शासन ने

स्कूल की ओर रूख किया।

12वीं पास होते ही आवेदन करने पर सीधे शासकीय नौकरी देने का प्रावधान होने के कारण नौकरी के लालच में कई

युवाओं ने 12वीं पास कर ली।

जब कमार युवक-युवतियां पढ़-लिखकर नौकरी करने के काबिल हुए और जिला प्रशासन के पास नौकरी के लिए आवेदन दिया।

तब नौकरी देने का प्रावधान ही बंद हो गया।

वर्तमान में आदिम जाति कल्याण विभाग में नौकरी के लिए 100 से अधिक कमार युवक-युवतियों का आवेदन लंबित है,

लेकिन विभाग में रिक्त पद नहीं होने और शासन के नए नियमावली के तहत अब सीधे नौकरी दे पाना संभव नहीं है।

ऐसे में इन शिक्षित बेरोजगारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।

1 टिप्पणी

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