शोध के लिए मिलने वाले फंड को छिपाने के आरोप में हार्वर्ड ने चीनी वैज्ञानिक को छोड़ा …

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शोध के लिए मिलने वाले फंड को छिपाने के आरोप में हार्वर्ड ने चीनी वैज्ञानिक को छोड़ा

 हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने एक चीनी वैज्ञानिक को शोध के लिए मिले चीनी फंड को छिपाने के आरोप में
छोड़ दिया है। इस चीनी प्रोफेसर का नाम चार्ल्स एम. लिबर है। इस वैज्ञानिक को जनवरी में गिरफ्तार
किया गया था। अमेरिकी पुलिस ने इस वैज्ञानिक को इस वजह से गिरफ्तार किया गया था कि वो
अमेरिकी रिसर्च संस्थानों से डेटा चीन को भेज रहा था। अमेरिकी न्याय विभाग को इसके बारे में
जानकारी मिली थी उसके बाद एक्शन लिया गया।

वैज्ञानिक चार्ल्स पर जब ये आरोप लगाए गए तो उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को सिरे से
खारिज कर दिया। कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया है। उसके बाद उन्होंने अपना मुकदमा
लड़ने के लिए एक जाने माने वकील को हायर किया। वकील का नाम मार्क एल.मुकासी है। मुकासी
ने बीते साल हत्या के एक मामले में आरोपी नौसेना के पूर्व मुख्य अधिकारी एडवर्ड गैलाघेर को
बचाया था। इस अधिकारी पर हत्या का आरोप था।

अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, लिबर ने चीन में वुहान प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में एक “रणनीतिक
वैज्ञानिक” बनने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके लिए उन्हें 50 हजार डॉलर का मासिक
वेतन, वार्षिक जीवन व्यय में 150,000 डॉलर और वुहान में दूसरी प्रयोगशाला के लिए 1.5 मिलियन
डॉलर से अधिक का अधिकार दिया गया था। बचाव पक्ष के वकील का कहना था कि उन्हें 2012 में
सूचित किया गया था कि उन्हें हजारों प्रतिभाओं की योजना में भाग लेने के लिए चुना गया था। हार्वर्ड
को तब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी, जिसने अपने
अनुसंधान परियोजनाओं के लिए अनुदान में  10 मिलियन डॉलर प्रदान किए थे।

अपने ऊपर लगाए गए आरोपों पर सफाई देते हुए वैज्ञानिक ने कहा कि उसके ऊपर जो भी आरोप
लगाए गए हैं वो पूरी तरह से निराधार है, उसने कभी भी इस तरह की चीजें नहीं की है। जबकि आरोप
लगाने वाले वकील कहते रहे कि लिबर ने अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरा नहीं किया है, वो इसमें
विफल रहे हैं। इस वजह से उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।