सड़क के पास रहने वालों में अधिक मिले सूजन पैदा करने वाले कारक …

2
2
CARONA

 कोरोना मरीजों के शरीर के आंतरिक हिस्सों में सूजन पैदा करने वाले आइएल (इंटरल्युकिन)-6 मार्कर की
चर्चा खूब होती है। वहीं प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है? इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा
सकता है कि इसके दुष्प्रभाव से स्वस्थ लोगों के खून में भी ऐसे कारक बढ़ जाते हैं, जिससे शरीर के अंदर
सूजन व ऑटो इम्युन की बीमारियां हो सकती हैं। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के शोध
में यह बात सामने आई है। इसमें दिल्ली के 18 फीसद लोगों के खून के सैंपल में ऑटो एंटीबॉडी व 68
फीसद लोगों के सैंपल में सूजन पैदा करने वाले कारक पाए गए। खास बात यह कि सड़क से 200 मीटर
के नजदीक रहने वाले लोगों में ये कारक अधिक पाए गए।

एम्स का यह शोध यूरोपियन जर्नल ऑफ रूमेटोलॉजी में प्रकाशित भी हुआ है। संस्थान के रूमेटोलॉजी
विभाग के डॉक्टरों ने 500 लोगों पर यह शोध किया है, जो 10 सालों से दिल्ली में रह रहे हैं व जिन्हें कोई
बीमारी नहीं है। उनकी औसत उम्र 31 साल थी। इनमें 77 फीसद महिलाएं शामिल थीं। सभी के ब्लड
सैंपल लेकर तीन तरह की ऑटो एंटीबॉडी (आरएफ, एएनए, एएनटीआइ-सीसीपी) व पांच इन्फ्लमेटरी
मार्कर (टीएनएफ-ए, आइएल- 17ए, आइएल-1बी, आइएल-6 व एचएस-सीआरपी) की जांच की गई।

नौ फीसद लोगों में एएनए (एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी) व सात फीसद लोगों में आरएफ (रूमेटॉयड फैक्टर)
मिला। करीब दो फीसद लोगों में एंटी-सीसीपी (सिट्रूलिनेटेड सी प्रोटीन) ऑटो एंटीबॉडी मिली। वहीं 34.4
फीसद लोगों में आइएल-6 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। शोध में शामिल 90.4 फीसद लोग उच्च मध्यम
वर्गीय परिवार से तालुक रखते थे। अन्य लोग निम्न मध्यम वर्ग, निम्न व उच्च वर्गीय परिवारों के सदस्य थे।

2 टिप्पणी

  1. Please let me know if you’re looking for a article writer for your weblog. You have some really great articles and I believe I would be a good asset. If you ever want to take some of the load off, I’d absolutely love to write some material for your blog in exchange for a link back to mine. Please send me an email if interested. Cheers!

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here