अमेरिका का नया प्रशासन अब फरवरी 2020 में हुए समझौते की नए सिरे से समीक्षा कर रहा है जिसके तहत उसे 1 मई तक अपनी पूरी सेना को वहां से वापस करना है।

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अफगानिस्तान में शांति की स्थापना के लिए एक बार फिर कतर की राजधानी दोहा में अफगान सरकार और
तालिबान साथ-साथ बैठ गए हैं। अंजाम के बारे में अभी दोनों ही पक्ष कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। दोनों
ने इतना कहा है कि वार्ता अच्छे माहौल में शुरू हो गई है। तालिबान के प्रवक्ता डा. मुहम्मद नईम ने सोमवार
रात ट्वीट किया कि पहली जरूरत दोनों की रजामंदी से कार्यसूची को तैयार करना है।

ज्ञात हो कि जनवरी में जब एकदम वार्ता खत्म हुई थी, तब दोनों ही पक्षों ने अपनी संभावित कार्यसूची को एक
दूसरे को सौंपा था। अब इस पर सहमति बननी है। अफगान सरकार, अमेरिका और नाटो तीनों की ही प्राथमिकता
अब हिंसा में कमी लाना है। तालिबान ने कहा है कि यह बातचीत से ही संभव है।

अमेरिका का नया प्रशासन अब फरवरी 2020 में हुए समझौते की नए सिरे से समीक्षा कर रहा है, जिसके तहत
उसे 1 मई तक अपनी पूरी सेना को वहां से वापस करना है। इस मामले में वाशिंगटन इस पक्ष में है कि समय
सीमा को कुछ आगे बढ़ाया जाए।

फिर भी अभी अमेरिका और नाटो दोनों ने ही अफगानिस्तान में तैनात अमेरिका के ढाई हजार सहित दस हजार सै
निकों के भविष्य का कोई फैसला नहीं किया है। अब कतर की राजधानी दोहा में शुरू हुई वार्ता के नतीजों पर ही
सभी का ध्यान है। माना जा रहा है कि अफगानिस्तान की हिंसा का भविष्य भी इस वार्ता से ही तय होने वाला है।