अगर आप भी करवाने वाले है स्वास्थ्य बीमा, तो जान ले ये बात

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स्वास्थ्य बीमा आज देश की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। सरकार भी हेल्थ इंश्योरेंस को काफी बढ़ावा दे रही है और टैक्स में भी छूट दे रही है ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा बीमा करवायें। लेकिन बड़े पैमाने पर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के सक्रिय होने के बाद इनके द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में हर बारीक जानकारी मालूम होना बेहद जरूरी है ताकि इसका लाभ आप उठा सकें। तो कौन-कौन सी बातें आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी में जरूर होनी चाहिए? आईये जानते हैं…
एक्सीडेंट vs स्वास्थ्य
पॉलिसी धारकों को सबसे पहले समझने की जरुरत है कि एक्सीडेंट Vs हेल्थ इंश्योरेंस में अंतर क्या है। एक्सिडेंट इंश्योरेंस दुर्घटना में मौत का कवर देता है। इसमें बीमा कंपनी आपके नॉमिनी को बीमा का पैसा देगी। जबकि हेल्थ इंश्योरेंस से बीमारियों के इलाज के खर्चे की भरपाई की जा सकती है। अस्पताल में भर्ती होने पर इलाज के खर्चे का कवर मिलता है।

सब-लिमिट
जब भी आप हेल्थ इंश्योरेंस लेने का मन बनायें तो पहले ये देखें कि पॉलिसी में कोई सब-लिमिट तो नहीं है। कुछ हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसीज में सब-लिमिट नहीं होती है। जिस पॉलिसी में कोई कैप या सब-लिमिट नहीं हो वो पॉलिसी बेहतर रहेगी। इसके अलावा पॉलिसी लेते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि आपके घर के आसपास के कितने हॉस्पिटल और डॉक्टर आपकी पॉलिसी की लिस्ट में हैं।

फ्री लुक विंडो
भारत में हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां कई तरह की मौजूद हैं, इनमें एलआईसी की कई पॉलिसी में 15 दिनों का फ्री लुक विंडो होता है। अगर आपको पॉलिसी पसंद नहीं है तो फ्री लुक विंडो बाकी रहने तक पॉलिसी रिटर्न कर दें। आप किसी वित्तीय सलाहकार से इंश्योरंस के बारे में जानकारी लेकर उसकी सहायता से अपने लिए सही पॉलिसी को चुन सकते हैं। ऑनलाइन पॉलिसी खरीदने पर फ्री लुक पीरियड 30 दिन का होता है। हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में 3 साल से ज्यादा की पॉलिसी खरीदने पर ही ये सुविधा मिलती है। पॉलिसी डॉक्यूमेंट मिलने की तारीख साबित करना पॉलिसी होल्डर की जिम्मेदारी होती है। यह सिर्फ नई पॉलिसी लेने पर लागू होता, रिन्युअल पर नहीं लागू होता।