अमन ने ‘चौके-छक्के’ में गरीबी को नहीं बनने दी बाधा, दोस्त की मदद से इस तरह संवारा करियर …

0
2

हुनर के हाथ-पैरों में मुफलिसी की बेड़ियां थीं। उसने अमन सोनी को पढ़ने नहीं दिया। क्रिकेट में हाथ आजमाए
तो राह में आर्थिक संकट के कांटे बिछे थे। किट तक पास नहीं थी और कॅरियर की चिंता सता रही थी। माता-पिता
बेटे की परेशानी जानकर भी लाचार थे, लेकिन साथ ही प्रैक्टिस करने वाले अभिलाष से तकलीफ देखी नहीं गई।
उनकी मदद की पिच से अमन ने हरियाणा की अंडर-19 तक पहुंचने की कामयाबी पाई और सुनहरे भविष्य का
ताना-बाना बुना।

हरियाणा की अंडर-19 क्रिकेट टीम में चयनित होकर अमन ने भले ही जिले का नाम गौरवान्वित किया है, लेकिन
इस मंजिल को पाने में उन्हें दुश्वारियों से गुजरना पड़ा। भगवंतनगर निवासी पिता सुरेश और किरन सोनी दुश्वारियों
के चलते बेटे को कक्षा आठ से ज्यादा नहीं पढ़ा पाए। इतना भी धन नहीं था कि वह उसे क्रिकेट की किट दे पाते।
साथियों की किट से अमन अपने खेल को तराशते रहे। उन्नाव स्टेडियम में जूनियर क्रिकेट टीम के लिए ट्रायल में
हिस्सा लिया, लेकिन असफल रहे। इसके बाद 2013 में कानपुर ग्रीनपार्क में ट्रायल में कानपुर साउथ अकादमी
में चयन हो गया। इसके बाद वह लगातार लीग मैच खेलते रहे।

जून 2019 में दिल्ली क्रिकेट लीग में ट्रायल के लिए फार्म भरा। दिल्ली क्रिकेट लीग के लिए बुलावा आया तो
माता-पिता के पास 1500 रुपये भी नहीं जुट सके। साथ में प्रैक्टिस करने वाले मित्र अभिलाष ने साथी की मजबूरी
देख फीस भरी और लीग में भेजा। वहां भी अमन अभिलाष की ही किट लेकर गए थे।