अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर साधु-संत लगातार सरकार पर दबाव बनाने में जुटे हैं. देश भर के साधु-संत दिल्ली में दो दिन जुटे थे. ऐसे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साधु-संतों से दिवाली पर अयोध्या पहुंचने की अपील की है. सीएम योगी ने कहा, ‘मैं दिवाली के अवसर पर सभी सम्मानित साधु-संतों को अयोध्या में दिवाली मनाने के लिए आमंत्रित करता हूं. आप सभी से अनुरोध करता हूं कि आप 6 और 7 नवंबर को भगवान राम के नाम पर एक मिट्टी का दिया जलाएं.’ बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ ने जो इशारा किया है उसने रामवादी राजनीति के भक्तों की उम्मीद बढ़ा दी है. योगी आदित्यनाथ ने कहा है था कि वो दिवाली के मौके पर खुशखबरी लेकर अयोध्या जा रहे हैं. जल्द ही कुछ अच्छा होने वाला है. योगी सरकार अयोध्या में 151 मीटर ऊंची राम की तांबे की प्रतिमा बनवाने जा रही है. इस प्रतिमा को 36 मीटर के चबूतरे पर रखा जाएगा. बता दें कि पिछले साल योगी सरकार ने 100 मीटर ऊंची भगवान राम की प्रतिमा लगाने की योजना का एलान किया था. तब ‘नव्य अयोध्या’ योजना के तहत धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने राज्यपाल राम नाईक को प्रपोजल भी दिखाया था. उत्तर प्रदेश सरकार इस बार भव्य तरीके से दीपोत्सव का आयोजन अयोध्या में कर रही है. राम की जन्मस्थली अयोध्या में दीपोत्सव के त्रिदिवसीय समारोह में कोरियाई राजकुमारी भी मौजूद रहेंगी. पांच देशों के कलाकारों की टीम इस मौके पर रामलीला का मंचन करेगी. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन शुरू हुआ है. पिछली बार जब दीपोत्सव का आयोजन हुआ था तब एक विश्व रिकॉर्ड बना था. इस बार की दीवाली और भी भव्य होने वाली है. इस बार दिवाली के दिन अयोध्या में तीन लाख दीप जलाए जाएंगे. भरतकुंड, गुप्तार घाट, नया घाट समेत अयोध्या में सरयू के घाटों पर हजारों की संख्या में दीप रखे जाएंगे.

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पटना । भाजपा के मंत्री गिरिराज सिंह के बाद अब बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने राम मंदिर को लेकर बड़ा बयान दिया है और कहा है कि मस्जिद तो कहीं भी बन सकता है। लेकिन, राम मंदिर कहीं और नहीं बन सकता है।

उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट जल्द से जल्द अयोध्या मामले पर सुनवाई कर फैसला दे, क्योंकि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करोड़ों हिन्दुओं की अभिलाषा है। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट आधी रात में कर्नाटक सरकार से जुड़े फैसले कर सकती है, समलैंगिकों पर फैसला कर सकती है तो फिर राम मंदिर का मामला वर्षों से अदालत में क्यों लटका है।

सुशील मोदी ने बार-बार अपने भाषण में दुहराया कि इस देश की जनता जानना चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने इस मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद उसे टाल क्यों दिया?

सुशील मोदी ने अपने भाषण में न केवल सर्वोच्च न्यायालय को करोड़ों हिंदुओं की जन भावना के अनुरूप फ़ैसला देने का सुझाव दिया, बल्कि मुस्लिम समाज के लोगों को भी ये सलाह दी कि उस जगह पर मस्जिद बनाने की ज़िद छोड़ दीजिए, क्योंकि मस्जिद कहीं भी बन सकता है, लेकिन राम मंदिर कहीं और नहीं बन सकता. क्योंकि राम का जन्मस्थान वहीं है।

हालांकि सुशील मोदी ने अपने पार्टी के अन्य नेता गिरिराज सिंह की तरह कोई भड़काऊ बात नहीं की है। लेकिन, बिहार के नेताओं के अयोध्या मुद्दे पर सक्रिय आक्रामक रुख से साफ़ है कि उन्हें लगता है कि इस मुद्दे के आड़ में वह कई कारणों से नाराज़ चल रहे अगड़ी जातियों के ग़ुस्से को शांत कर सकते हैं।