आगे ठीक नहीं रुपये की राह, चुनावी अनिश्चितता ने बढ़ाई घबराहट: पोल

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2019 में रुपये की कमजोर शुरुआत आने वाले दिनों में इसकी चाल का संकेत दे रही है।

रॉयटर्स के पोल में आर्थिक विश्लेषकों ने मई में होने वाले आम चुनाव को लेकर जारी अनिश्चितता और भारत के

अमेरिका के साथ संभावित ट्रेड वॉर को लेकर चिंता जताई है, जिसका असर रुपये पर पड़ने की उम्मीद है।

पिछले साल रुपया करीब 10 फीसद तक टूटते हुए, अक्टूबर में 74.485 के निचले स्तर पर चला गया था।

रुपये में आई यह गिरावट 2013 के बाद का सबसे कमजोर प्रदर्शन था।

उभरते बाजारों में हुई बिकवाली और

तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की वजह से घाटे की बढ़ती संभावना के कारण रुपये में यह गिरावट आई थी।

हालांकि, विश्लेषकों में इस बात को लेकर सहमति है कि रुपया अगले 12 महीनों में अपने पिछले रिकॉर्ड को पार

नहीं करेगा। पोल में भाग लेने वाले करेंसी विश्लेषकों के मुताबिक रुपये में अगले 12 महीनों के दौरान एक फीसद

से अधिक की गिरावट आ सकती है।

डॉलर के मुकाबले अगर अन्य करेंसी को लेकर देखा जाए तो रुपया 2018 के नुकसान की कुछ हद तक भरपाई

कर चुका है। इस साल रुपया करीब एक फीसद तक टूट चुका है और इसके मई अंत तक दो फीसद तक कमजोर

होने की उम्मीद है। विश्लेषकों ने आगामी चुनाव की अनिश्चितता को लेकर यह अनुमान जताया है।

राबोबैंक में सीनियर इकॉनमिस्ट ह्यूगो एरकेन ने कहा, ‘हम मई में बीजेपी के जीत की उम्मीद कर रहे हैं लेकिन बीजेपी

के लिए इस बार भारी बहुमत हासिल करना मुश्किल होगा। इस वजह से कई जरूरी सुधार को पूरा करना मुश्किल होगा।’

उन्होंने कहा, ‘मीडियम टर्म में हम महंगाई दर के सामान्य होने की वजह से रुपये में अवमूल्यन की उम्मीद कर रहे हैं।

लेकिन अगर बीजेपी मई में हार जाती है,

तो बाजार में वित्तीय अस्थिरता आ सकती है और रुपया 74 के स्तर को छू सकता है, जो पिछले साल का स्तर था।’