आजम खान को लेकर कश्मकश में अखिलेश यादव, कौन बनेगा संसदीय दल का नेता?

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17 जून से लोकसभा का सत्र शुरु हो रहा है. उसके पहले अखिलेश यादव को लोकसभा में संसदीय दल का नेता चुनना होगा. मुलायम सिंह को संसदीय दल का नेता बनाया ही जाएगा लेकिन अखिलेश यादव चीफ व्हिप बने तो उनके कद के मुताबिक नहीं होगा और पिता पुत्र दोनों के पास पद रहे तो पार्टी में गलत संदेश जाएगा.

कहते हैं कि परेशानियां जब आती हैं तो चौतरफा आती हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बारे में ये बात इस वक्त बिलकुल सच साबित हो रही है. 23 मई को नतीजे आने के बाद सकते में आए अखिलेश यादव न तो कोई हार की समीक्षा बैठक कर पाए और न ही हार के नतीजों का पोस्टमॉर्टम.

अब उनके सामने एक और मुसीबत आ खड़ी हुई है. समाजवादी पार्टी को लोकसभा में 5 सीटें मिली हैं.

आजमगढ़ से अखिलेश यादव, मैनपुरी से मुलायम सिंह यादव, रामपुर से आजम खान,

मुरादाबाद से डॉक्टर हसन और संभल से शफीकुर्ररहमान बर्क.

17 जून से लोकसभा का सत्र शुरु हो रहा है. उसके पहले अखिलेश यादव को

लोकसभा में संसदीय दल का नेता चुनना होगा. मुलायम सिंह को संसदीय दल का नेता बनाया ही

जाएगा लेकिन अखिलेश यादव चीफ व्हिप बने तो उनके कद के मुताबिक नहीं

होगा और पिता पुत्र दोनों के पास पद रहे तो पार्टी में गलत संदेश जाएगा.

डॉक्टर हसन पहली बार सांसद बने हैं और शफीकुर्रहमान 92 साल के हैं.

कुल मिलाकर आजम खान को चीफ व्हिप बनाना पड़ सकता है.

अब मुश्किल ये है कि मुलायम सिंह और शफीकुर्रहमान बुजर्ग होने के साथ

लोकसभा की कार्यवाही में बहुत सक्रियता से भाग ले नहीं सकते.

डॉक्टर हसन पहली बार ही जीते हैं तो फिर हर मुद्दे पर पार्टी का लोकसभा में पक्ष रखने के लिए अखिलेश यादव को खुद सत्र में रहना पड़ेगा.

अगर आजम खान को मौका दिया तो वर्तमान माहौल में उनके भाषण से पार्टी को फायदा की

जगह नुकसान ही न उठाना पड़ जाय. इसी डर से पूरे लोकसभा चुनाव में

आजम खान रामपुर के अलावा केवल मुरादाबाद में ही पार्टी का प्रचार करने गए. अखिलेश कशमकश में हैं.

17 जून तक इंतजार करिए कि लोकसभा में पार्टी के कद्दावर नेताओं के बीच अखिलेश अपना कद कैसे बचाते हैं.