आज भी दुनिया में भूखे पेट सोने को मजबूर हैं करोड़ों लोग, जाने भारत की स्थिति …

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प्रतिवर्ष 16 अक्टूबर को दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा एवं खाद्य की पहुंच सुनिश्चित करने तथा भुखमरी को समाप्त
करने के उद्देश्य से विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है। भोजन का अधिकार मानव का बुनियादी अधिकार है, लेकिन
आज भी विश्व में करोड़ों लोग भुखमरी के शिकार हैं। भारत भी भुखमरी की समस्या से जूझ रहा है। यह सही है
कि भुखमरी एक वैश्विक समस्या है, लेकिन हमें यह भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि बहुत से देशों ने सुदृढ़
एवं सुव्यवस्थित नीतियां बनाकर इससे मुक्त पाई है। इसके विपरीत भारत में भुखमरी की समस्या को खत्म करने
को लेकर कोई सकारात्मक प्रयास नहीं हुए हैं।

यही कारण है कि 119 देशों के वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2018 में भारत 103वें पायदान पर है। इस सूचकांक
में 2017 में भारत 100वें, 2016 में 97वें एवं 2015 में 80वें नंबर पर था। जबकि 2014 में भारत 55वें पायदान
पर था। भारत की चिंता इसलिए और भी बढ़ जाती है कि वह इस सूचकांक में अपने पड़ोसी देशों चीन 25वें,
बांग्लादेश 86वें, नेपाल 72वें एवं श्रीलंका 67वें से भी पीछे है। विश्व की आबादी तीव्र गति से बढ़ रही है। ऐसे में
सभी के लिए खाद्य की पहुंच एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ा प्रश्न है। दुनिया में एक तरफ तो ऐसे लोग हैं,
जिनके घर में खाना खूब बर्बाद होता है और फेंक दिया जाता है। वहीं दूसरी ओर ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है,
जिन्हें एक समय का भोजन भी नहीं मिल पाता।