आपके बच्चे के हाथ में स्मार्टफोन और कोकीन एक समान है, इस तरह करें बचाव ….

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रोते बच्चे को स्मार्टफोन मिलते ही आंखें चमक उठती हैं। बच्चा खाना न खाए तो मोबाइल पर वीडियो चलते
ही पूरी प्लेट साफ हो जाती है। यह कमोबेश हर दूसरे घर का नजारा है। पर क्या आपने कभी यह सोचा कि
बच्चों की यह खुशी दरअसल उनका एडिक्शन यानी लत बनती जा रही है। यह लत भी उतनी ही खतरनाक
है जितनी शराब, सिगरेट और अन्य नशीले उत्पादों की है। दुनियाभर के थेरेपिस्ट और मनोचिकित्सक यह
बताने लगे हैं कि छोटे बच्चे के हाथ में मोबाइल देना मतलब उनके हाथ में एक वाइन की बोतल या एक ग्राम
कोकीन देने जैसा है। इसी दिशा में काम कर रहे जानकारों का मानना है कि अधिकतर बच्चों में मोबाइल व
इंटरनेट के अधिक इस्तेमाल का नकारात्मक असर सामने आ रहा है। इंटरनेट की दुनिया में उन बच्चों,
किशोरों और युवाओं का अपना-अपना कोना है जिसके अजीबो-गरीब नाम हैं। आइए, इस गुत्थी को
समझते हैं।

सामाजिक मनोविज्ञान का शब्द ‘लोसिंग’ हैं जिससे ‘लोफर’ शब्द बना है। इंटरनेट के पहले भी कुछ लोग बिना
किसी कार्य यहां-वहां भटकते दिखते रहते थे। वहीं काम अब इंटरनेट पर हो रहा है। बिना किसी उद्देश्य के
इंटरनेट सर्फिंग करते रहने से मस्तिष्क पर गहरा असर पड़ता है। क्लिनिकल साइक्लॉजिस्ट डा. सीमा शर्मा
के अनुसार कुछ इस तरह का असर इनमें देखने को मिलता है।