उन्नाव रेपकांड: सेंगर पर कसा कानून का शिंकजा, POCSO एक्ट की एक और धारा लगी

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उन्नाव रेपकांड के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर पर कानून का शिकंजा कसता जा रहा है.

रेप केस में दिल्ली की अदालत ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसिस ऐक्ट (POCSO act) की

एक और धारा कुलदीप सिंह सेंगर पर लगा दी है.

इस धारा के तहत एक सरकारी कर्मचारी द्वारा नाबालिग से रेप करने का चार्ज लगता है.

इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है.

नई धारा को कुलदीप सिंह सेंगर पर पहले से लगी POCSO की धारा 6 के साथ मिलाकर देखा जाएगा.

इसके मुताबिक ताकत और पद का गलत इस्तेमाल कर बच्चों का यौन शोषण करने वालों को सजा देने का

प्रावधान है. आईपीसी की धारा 21 के तहत सरकारी कर्मचारी की जो व्याख्या की गई है उसमें वह हर शख्स

आता है जिसे सरकार से सैलरी मिलती है. शख्स सरकारी कर्मचारी हो या किसी आयोग में हो या फिर किसी

संवैधानिक पद पर हो. विधायक का पद संवैधानिक पद होता है.

नियम के तहत कुलदीप सिंह सेंगर विधायक होने के नाते सरकार से सैलरी पाते हैं लिहाजा इस धारा के तहत

सेंगर पर आरोप तय हो सकते हैं.

उन्नाव रेपकांड में 9 अगस्त को दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में कुलदीप सिंह सेंगर पर आरोप तय किए गए थे.

कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर पर आइपीसी की धारा 120b, 363, 366, 109, 376 (i) और पॉक्सो एक्ट 3 और

4 के तहत आरोप तय किए थे. इससे पहले हुई सुनवाई में सीबीआई ने जज से कहा था कि जांच में साफ हो गया

था कि सेंगर पर 4 जून 2017 को पीड़िता के साथ बलात्कार करने और शशि सिंह(दूसरा आरोपी) के साजिश में

शामिल होने के आरोप सही हैं.