एक घायल एथलीट का जुनूनी सफर , आयरनमैन ट्रायथलॉन…

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हर खिलाड़ी का मकसद होता है मुश्किलों से पार पाकर खास मुकाम हासिल करना।

उसके सामने बड़ी चुनौतियां होती हैं। अगर आप इतिहास देखें तो जितने भी काम हुए हैं,

जैसे कोई बड़ी खोज, युद्ध या बड़े साम्राज्य खड़े करना…इन सबके पीछे जो शक्ति थी,

उसे कहते हैं ‘जुनून’। ज़िंदगी में कुछ पाने के लिए आपके अंदर जुनून होना ज़रूरी है।

ऐसा ही कुछ वर्ल्ड आयरनमैन ट्रायथलॉन में हिस्सा लेने वाले कुमार किशलय राय के मामले में देखने को मिला।

उन्होंने दो साल इस ट्रायथलॉन के लिए कड़ी मेहनत की।

लेकिन टूर्नामेंट के कुछ दिन पहले ट्रेनिंग के दौरान उनके हाथ में फ्रेक्चर हो गया।

इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी, ट्रायथलॉन में हिस्सा लिया और आयरनमैन का खिताब भी हासिल किया।

साल 2014 में बढ़ते वज़न की वजह से किशलय बीपी के शिकार हो गए थे।

इससे निपटने के लिए उन्होंने फिटनेस की राह अपनाई।

इसी दौरान उन्हें आयरनमैन ट्रायथलॉन के बारे में पता चला और उन्होंने इसमें हिस्सा लेने की ठान ली।

करीब दो साल तक कड़ी ट्रेनिंग की।

किशलय को भारत के सबसे तेज़ आयरनमैन सुब्रमणि वेंकटेश और मोहित ओब्रॉय ने कोचिंग दी।

किशलय मलेशिया में 17 नवंबर 2018 को होने वाली प्रतियोगिता के लिए पूरी तरह तैयार थे।

लेकिन 27 अक्टूबर को ट्रेनिंग के दौरान उनका एक्सीडेंट हुआ और हाथ में फ्रेक्चर हो गया।

डॉक्टर ने उन्हें आराम की सलाह दी। लेकिन किशलय का फोकस सिर्फ मलेशिया ट्रायथलॉन पर था,

इसलिए वह 5 दिन में ही वापस ट्रेनिंग पर लौट आए।

फिर कड़ी मेहनत और अपने दृढ़ संकल्प से 17 नवंबर को मलेशिया आयरनमैन ट्रायथलॉन में हिस्सा लिया।

बायें हाथ में फ्रेक्चर होने की वजह से काफी दर्द था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और एक ही हाथ से स्विमिंग,

साइक्लिंग और मैराथन दौड़ पूरी की।