कंज्यूमर की जेब पर लगेगी चपत! अप्रैल से बढ़ सकती हैं PNG-CNG की कीमतें

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PNG CNG prices गैस कंज्यूमर्स को झटका लगाने वाली एक खबर आ रही है. रेटिंग एजेंसी केयर के मुताबिक अप्रैल महीने से देश में गैस की कीमतों में 18 फीसदी तक की बढ़त हो सकती है

अपने घर के बजट में और बढ़ोतरी के लिए तैयार हो जाइए. अप्रैल से प्राकृतिक गैस की कीमतों में 18 फीसदी तक की बढ़त होने का अनुमान है. इससे देश में पाइप से आपूर्ति होने वाली रसोई (PNG) और CNG की कीमतों में बढ़त हो सकती है. केयर रेटिंग की एक रिपोर्ट में इस बढ़त का अनुमान जारी किया गया है. यही नहीं, इस बढ़त से मैन्युफैक्चरिंग, ट्रैवल, एनर्जी सेक्टर पर असर पड़ सकता है और महंगाई भी बढ़ सकती है.

सरकार की साल 2014 की घरेलू गैस नीति में कहा गया था कि प्राकृतिक गैस की कीमतों की हर छह माह में समीक्षा की जाएगी. इस योजना के तहत अब सरकार 1 अप्रैल, 2019 को घरेलू गैस कीमतों की समीक्षा करेगी. केयर की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हमें लगता है कि अप्रैल 2019 से सितंबर 2019 के लिए घरेलू गैस की कीमतें मौजूदा $3.36/mmBtu से बढ़कर $3.97/mmBtu तक हो सकती है, यानी इसमें करीब 18 फीसदी की बढ़त होगी.

रेट में यह बढ़त गैस उत्पादकों के लिए अच्छी खबर हो सकती है.

इससे ओएनजीसी, ऑयल इंडिया, वेदांता, रिलायंस जैसी अपस्ट्रीम गैस एक्सप्लोरेशन करने वाली

कंपनियों का राजस्व बढ़ जाएगा. लेकिन कंज्यूमर के लिहाज से यह बुरी खबर होगी,

क्योंकि इससे वाहनों में इस्तेमाल होने वाला कॉम्प्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और PNG महंगी हो जाएगी.

इससे बिजली उत्पादन, उर्वरक उत्पादन और पेट्रोकेमिकल उत्पादन की लागत भी बढ़ जाएगी.

गैस की कीमत बढ़ने से थोक मूल्य आधारित (WPI) महंगाई भी बढ़ सकती है.

गौरतलब है कि घरेलू गैस कीमतें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और रूस में प्राकृतिक गैस कीमतों के आधार पर तय हो सकती हैं.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमत में बढ़ोतरी से घरेलू बाजार में करीब तीन माह

बाद गत 1 मार्च को ही रसोई गैस (LPG) के दाम में वृद्धि की गई है.

गैर सब्सिडी वाला रसोई गैस सिलेंडर दिल्ली में 42.50 रुपए और सब्सिडी का 2.08 रुपए

महंगा कर दिया गया था.

एलपीजी की कीमत तय करने की अलग व्यवस्था है.

औसत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क दर और विदेशी मुद्रा विनिमय दर के अनुरूप LPG सिलेंडर के दाम तय होते हैं,

जिसके आधार पर सब्सिडी राशि में हर महीने बदलाव होता है.

दूसरी तरफ, भारत में लगभग अस्सी फीसदी तेल का आयात किया जाता है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल प्रति बैरल के हिसाब से खरीदा और बेचा जाता है.

एक बैरल में तकरीबन 162 लीटर कच्चा तेल होता है.