कर्मचारियों की सुरक्षा व वेतन पर दो बिल संसद में पेश, करोड़ों लोगों को मिलेगा लाभ

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श्रम सुधारों की दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में प्रस्तावित श्रम संहिताओं
से संबंधित दो बिल पेश किए। इनमें एक का संबंध कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा, कार्यदशाओं
एवं स्वास्थ्य से, जबकि दूसरे का समय पर तथा न्यूनतम निर्धारित मजदूरी सुनिश्चित करने से है। इनके
जरिए 17 मौजूदा श्रम कानूनों को दो श्रम संहिताओं में समेटा जा रहा है।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने लोकसभा में कर्मचारियों की कार्यगत सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं
कार्यदशाओं पर संहिता (कोड ऑन ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस -ओएसएच) विधेयक
2019 तथा वेतन संहिता विधेयक 2019 पेश किए। इसका लाभ करोड़ों कर्मचारियों को मिलेगा।

ओएसएच कोड में मौजूदा 13 श्रम कानूनों का सरलीकरण, संशोधन एवं विलय कर एक कानून में तब्दील
किया गया है। ये खदानों एवं गोदी-बंदरगाहों को छोड़ दस या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी प्रतिष्ठानों
पर लागू होगा। इसमें सिनेमा एवं थियेटर कर्मचारियों को भी डिजिटल ऑडियो-विजुअल कर्मचारी मानते हुए
शामिल किया गया है।

इससे इलेक्ट्रानिक मीडिया के सभी रूप, जिनमें ई-पेपर, रेडियो शामिल है, इसमें आ गए हैं। इससे इस
क्षेत्र में कार्यरत पत्रकारों व कर्मचारियों कीकार्यदशाओं में सुधार होगा। विधेयक के कानून बनने पर एक राज्य
से दूसरे राज्य में जाकर काम करने वाले श्रमिकों को भी सुरक्षा प्राप्त होगी।

बेसहारा बुजुर्गो की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए ओएसएच कोड विधेयक में परिवार की परिभाषा के
तहत आश्रित दादा-दादी को भी परिवार का हिस्सा बनाया गया है। बिल में 10 से अधिक कर्मचारियों वाले
सभी प्रतिष्ठानों के लिए एकल पंजीकरण की अवधारणा प्रस्तुत करने के साथ ‘राष्ट्रीय कार्यगत सुरक्षा एवं
स्वास्थ्य सलाहकार बोर्ड’ की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है।