कुल्लू मनाली की ठंडी हवाए ……

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मनाली (ऊंचाई 1,950 मीटर या 6,398 फीट) कुल्लू घाटी के उत्तरी छोर के निकट व्यास नदी की घाटी में स्थित,

भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य की पहाड़ियों का एक महत्वपूर्ण पर्वतीय स्थल (हिल स्टेशन) है।[2] [3]प्रशासकीय तौर

पर मनाली कुल्लू जिले का एक हिस्सा है, जिसकी जनसंख्या लगभग 30,000 है। यह छोटा सा शहर लद्दाख और वहां

होते हुए काराकोरम मार्ग के आगे तारीम बेसिन में यारकंद और ख़ोतान तक के एक अतिप्राचीन व्यापार मार्ग का शुरुआत था।

नाली का मौसम जाड़े में प्रबल रूप से ठंडा और गर्मी के दिनों में हल्का ठंडा रहता है। तापक्रम की सीमा वर्ष भर 4 °से.

(39 °फ़ै) से 20 °से. (68 °फ़ै) रहती हैं। गर्मी के दिनों में औसत तापमान 04 °से. (39 °फ़ै) और 15 °से. (59 °फ़ै),
तथा जाड़े के दिनों में −15 °से. (5 °फ़ै) से 05 °से. (41 °फ़ै) के बीच रहता है।

मासिक वर्षा (बर्फ़बारी/बारिश) नवंबर में 24 मि॰मी॰ (0.079 फीट) से लेकर जुलाई के 415 मि॰मी॰ (1.362 फीट) के बीच

बदलती रहती है। औसतन थोड़ी 45 मि॰मी॰ (0.148 फीट) पात (बर्फ़बारी/बारिश) जाड़े और बसंत के मौसम के दौरान प्राप्त

होती है, जो मानसून के प्रवेश करते ही गर्मियों में कुछ 115 मि॰मी॰ (0.377 फीट) बढ़ जाती है। औसतन कुल वार्षिक पात

(बर्फ़बारी/बारिश) 1,520 मि॰मी॰ (4.99 फीट) है। इस क्षेत्र में हिमपात जो आमतौर पर दिसंबर के महीने में होती थी, पिछले

पन्द्रह वर्षों से विलंबित होकर जनवरी या शुरूआती फरवरी में होने लगी है।

मनाली शहर का नाम मनु के नाम पर पड़ा है।

मनाली शब्द का शाब्दिक अर्थ “मनु का निवास-स्थान” होता है।

पौराणिक कथा है कि जल-प्रलय से दुनिया की तबाही के बाद मनुष्य जीवन को दुबारा निर्मित करने के लिए साधु

मनु अपने जहाज से यही पर उतरे थे। मनाली को “देवताओं की घाटी” के रूप में जाना जाता है।

पुराने मनाली गांव में ऋषि मनु को समर्पित एक अति प्राचीन मंदिर हैं