केजरीवाल का वो मास्टर स्ट्रोक, जो विधानसभा चुनाव में सबको चौंका सकता है

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दिल्ली मेट्रो और डीटीसी बसों में महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा को अरविंद

केजरीवाल का मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा. मकसद महिला वोटबैंक के दम पर 2020 में होने

वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में सफलता हासिल करने का है.

दिल्ली में लोकसभा की सभी सात सीटों पर करारी हार के बाद अब अरविंद केजरीवाल सरकार ने पूरा ध्यान विधानसभा चुनाव पर फोकस कर लिया है.

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में कहीं लोकसभा जैसा हश्र न हो,

इसके लिए पार्टी अपने आधार को बढ़ाने में जुटी है. इसी कड़ी में एक नया ‘महिला वोट बैंक’ तैयार करने का मकसद है.

दिल्ली मेट्रो और डीटीसी बसों में महिलाओं को मुफ्त सफर की सौगात को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है.

चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि कुल 1.43 करोड़ मतदाताओं में 64 लाख से ज्यादा महिलाएं हैं.

जाहिर सी बात है कि महिलाओं की आबादी अच्छी-खासी है.

ऐसे में महिलाओं को खुश कर विधानसभा चुनाव में सफलता हासिल की जा सकती है.

माना जा रहा है कि इसी 64 लाख महिला वोटर्स को टारगेट कर ही अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी सरकार ने महिलाओं को मुफ्त सफर की सौगात देने की घोषणा की है.

सोमवार को दोपहर इस स्कीम की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दो से तीन महीने के

भीतर सुविधा शुरू हो जाएगी. विभागों से प्रजेंटेशन मांगा गया है.

हालांकि उन्होंने कहा कि सब्सिडी थोपी नहीं जाएगी.

जो महिलाएं सक्षम हैं, वे टिकट लेकर यात्रा कर सकतीं हैं. लाखों महिलाओं से जुड़ी इस स्कीम को आम आदमी पार्टी सरकार का मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा.

दिल्ली मेट्रो की बात करें तो विभिन्न रूट पर हर दिन औसतन 26 लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं.

इसमें करीब 30 से 33 फीसद महिलाएं होतीं हैं. इस प्रकार देखें तो केजरीवाल सरकार के फ्री

राइड फैसले से दिल्ली में हर दिन आठ लाख से अधिक महिलाएं मुफ्त सफर की सुविधा का लाभ उठा सकेंगी.

ऐसा भी नहीं है कि दिल्ली में सिर्फ आम जन ही मेट्रो से सफर करते हैं.

सुविधासंपन्न परिवार भी मेट्रो से सफर पसंद करते हैं.

वजह है कि जाम के झाम से जूझती दिल्ली में मेट्रो ही एक सहारा है, जो समय से गंतव्य तक पहुंचाती है.

मेट्रो से सफर में धन की भी बचत होती है.

दिल्ली की आबोहवा के लिए भी फायदेमंद

सर्दियों के मौसम में जब दिल्ली प्रदूषण की चपेट में होती है. चारों ओर फॉग ही फॉग नजर आता है.

तब मेट्रो, डीटीसी बसों आदि सार्वजनिक परिवहन के साधनों के किराए में कमी कर लोगों को

उनके इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करने की मांग उठती है.

मुफ्त सफर की सुविधा लागू होने पर उन महिलाओं में भी मेट्रो से सफर करने की रुचि जागेगी,

जो अब तक घर या दफ्तर तक आने-जाने के लिए निजी वाहनों का इस्तेमाल करती हैं.

निजी वाहनों का इस्तेमाल कम होने से प्रदूषण में कमी होगी.

महिलाओं को फ्री यात्रा देने में डीएमआरसी को

होने वाले नुकसान की भरपाई दिल्ली सरकार करेगी.

एक आंकड़े के मुताबिक दिल्ली मेट्रो और डीटीसी की बसों में इस स्कीम के लागू होने से सरकार पर हर साल करीब 1200 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा.

सस्ती बिजली और मुफ्त पानी की सौगात पहले से

दिल्ली में 70 में से 67 सीटें जीतकर 2015 में सरकार बनाने के बाद ही केजरीवाल सरकार ने

दो बड़ी घोषणाएं कर जनता को लुभाने की कोशिश की थी.

आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्लीवासियों को हर महीने 20 हज़ार लीटर मुफ़्त पानी और 400 यूनिट बिजली बिल की दरें आधी करने की घोषणा की थी.

उस वक्त कहा गया था कि बिजली दरों में कटौती से 36 लाख और पानी फ्री किए जाने से 18 लाख परिवारों को सीधा फायदा होगा.

मौजूदा समय की बात करें तो वर्ष 2018 से  नई बिजली दरें निर्धारित हैं.

पिछले साल सरकार ने प्रति यूनिट एक से डेढ़ रुपये की चार्ज में कटौती की थी, हालाकि फिक्स्ड चार्ज कई गुना बढ़े थे.

मार्च 2018 के फैसले के मुताबिक वर्तमान में  200 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल पर 4 रुपये की जगह 3 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू है,

वहीं  201 से लेकर 400 यूनिट तक पर 5.95 रुपये की बजाय 4.50 रुपये प्रति यूनिट की दर लागू है.

इसके अलावा 401 से लेकर 800 यूनिट तक के बिजली के बिल का भुगतान 7.30 रुपये की बजाय 6.50 रुपये

प्रति यूनिट, 801 से लेकर 1200 यूनिट तक का भुगतान 8.10 की बजाय सात रुपये प्रति यूनिट और 1200 यूनिट

तक के बिजली बिल का भुगतान 8.75 रुपये की बजाय 7.75 रुपये प्रति यूनिट की दर से करने की व्यवस्था है.

सरकार का दावा है कि उसने बिजली की दरें बढ़ने से रोक रखीं हैं.