कैसे अटल की जगह आडवाणी बने अध्यक्ष और वो ऐतिहासिक यात्राएं …..

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आज भारतीय जनता पार्टी (BJP Foundation Day 2019) का 39 वां स्थापना दिवस है।

बीते 38 वर्षों में भाजपा ने दो सीट से दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी का सफर तय किया है।

कांग्रेस से मुकाबला करते हुए भाजपा के लिए ये सफर तय करना आसान नहीं था। इस दौरान पार्टी को कई उठा-पटक

और बदलावों के दौर से गुजरना पड़ा। इसमें लोकप्रिय राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी की जगह लालकृष्ण आडवाणी को

पार्टी अध्यक्ष बनाने से लेकर भाजपा की वो यात्राएं भी शामिल हैं, जिसने पार्टी एजेंडे में हिन्दुत्ववाद के साथ राष्ट्रवाद का रंग जोड़ा।

वर्ष 1952 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में जनसंघ की स्थापना हुई थी। शुरूआती वर्षों में जनसंघ का आधार काफी

सीमित था। वर्ष 1977 के जेपी आंदोलन के बाद कई दलों को मिलाकर कांग्रेस के विरोध में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में

जनता पार्टी की सरकार बनी। जनसंघ भी इसमें शामिल थी। सरकार में दो मंत्री बने, अटल बिहारी वाजपेयी को विदेश

मंत्रालय मिला और लालकृष्ण आडवाणी को सूचना प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। जल्द ही जनता पार्टी की सरकार

में कलह शरू हो गयी। नतीजतन, जनसंघ ने खुद को सरकार से अलग कर लिया। इसके बाद 6 अप्रैल 1980 को जनसंघ,

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में बदल गई।