क्या कोरोना वायरस दिमाग़ को पहुंचा सकता है नुकसान?

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क्या कोरोना वायरस दिमाग़ को पहुंचा सकता है नुकसान
क्या कोरोना वायरस दिमाग़ को पहुंचा सकता है नुकसान

कोविड सर्वाइवर नाम के एक फेसबुक सपोर्ट ग्रुप में 37 साल की चेल्सी ने कोरोना वायरस से जंग का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वह अकसर बात करते करते भूल जाती थीं, और एक ही कहानी बार-बार बताती थीं।
साथ ही उनके हाथ और पैर की उंगलियां सुन्न हो गईं, धुंधला दिखाई देने लगा और भयानक कमज़ोरी है। चेल्सी उन चुनिंदा लोगों में से हैं, जो 80 दिनों तक कोरोना वायरस से जूझती रहीं।

कोरोना वायरस संक्रमण

कोरोना वायरस के बारे में जितनी जानकारियां आ रही हैं, उससे ये साफ है कि ये सिर्फ एक सांस से जुड़ा संक्रमण नहीं है। ये वायरस आपके शरीर के अहम अंगों को प्रभावित कर सकता है, जिसमें दिमाग़ और नर्वस सिस्टम भी शामिल है।
चीन के वुहान शहर में कोविड-19 मरीज़ों में नर्वस सिस्टम से जुड़े लक्षण देखे गए, जिसमें दौरे पड़ना और बेहोशी शामिल थे।

इस महीने की शुरुआत में, फ्रांसीसी शोधकर्ताओं ने बताया कि कोविड के 84 प्रतिशत मरीज़, जिन्हें आई.सी.यू में भर्ती कराया गया था, उनमें न्यूरोलॉजिकल समस्याएं देखी गईं। इनमें से 33 प्रतिशत लोगों में डिसचार्ज होने के बाद भी भ्रमित
और अव्यवस्थित होना जारी रहा।

संक्रमण का दिमाग़ पर असर

लंबे समय से संक्रमण का असर मरीज़ के दिमाग़ पर भी पड़ता आया है। सिफिलिस और एच.आई.वी की वजह से डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी हो जाती है। ज़ीका वायरस भी दिमाग़ को बढ़ने से रोकता है, वहीं, लाइम बीमारी का अगर समय से इलाज न हो, तो उसकी वजह से तंत्रिकाओं में दर्द, चेहरे का पक्षाघात और रीढ़ की हड्डी में समस्या शुरू हो जाती है।