खुदाई में मिली तांबे की तलवार , तो दिखने लगा है सिनौली के नीचे दबा महाभारत का नगर….

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महाभारत की धरा सिनौली ने खुदाई प्रारंभ होते ही फिर नए रहस्य उगलने शुरू कर दिए हैं। खुदाई में निकले सभी प्राचीन अवशेष इस धरती के नीचे किसी रॉयल फैमिली के दफन होने का सबूत दे रहे हैं। शवाधान केंद्र और प्राचीन रथ निकलने के बाद तीसरे चरण की खोदाई में यहां से नरकंकाल, तांबे की तलवार, मृदभांड निकले हैं। सिनौली में खोदाई लगातार चल रही है, और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान की टीम को एक प्राचीन दीवार यहां मिलने के संकेत मिल रहे हैं।

हालिया खोदाई में यहां पर कुछ ईंट दिखाई पड़ रही है। इसे लेकर टीम उत्साहित है और मिशन की ओर बढ़ रही है। गांव के लोगों की भी खुशी का ठिकाना नहीं है। इतिहासकारों का दावा है कि जल्द ही सिनौली की जमीन किसी प्राचीन नगरीय बस्ती का इतिहास उगलेगी। यह बस्ती महाभारत काल की होगी, या किसी अन्य काल की यह शोध का विषय है।

सिनौली गांव में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उत्खनन शाखा द्वितीय एवं भारतीय पुरातत्व संस्थान लाल किला दिल्ली संयुक्त रूप से डा. संजय मंजुल और डा. अरविन मंजुल के निर्देशन में 15 दिसंबर से तीसरे चरण की खोदाई कर रही है। यहां अभी तक एक कंकाल, ताम्र निर्मित तलवार, 16 मृद भांड मिले चुके हैं। अब यहीं पर कुछ ईंट भी दिखाई दी हैं, जो दीवारनुमा है।

शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने दावा किया है कि यह कुछ ओर नहीं बल्कि शवाधान केंद्र की चाहरदीवारी हो सकती है। यहां पहले चरण की खोदाई में बड़ा शवाधान केंद्र मिल चुका है। इन ईंटों की लंबाई-चौड़ाई काफी ज्यादा है, जिनकी बनावट से यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह करीब 4000-4500 साल पुरानी हो सकती हैं। पिछली खोदाई में निकली इसी तरह की ईंटों की कार्बन डेङ्क्षटग से इनके काल की पुष्टि हो चुकी है।