गरमा रहा है सऊदी अरब के मिसाइल प्रोग्राम में चीन का हाथ होने का शक, बढ़ सकता है तनाव

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सऊदी अरब, अमेरिका और चीन के बीच आने वाले समय में तल्खियां बढ़ सकती हैं।

इसकी वजह सऊदी अरब का बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम है। अब इस प्रोग्राम में चीन का भी नाम सामने आ रहा है।

वाशिंगटन पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक चीन कथिततौर पर इसमें मदद कर रहा है। यही वो वजह है जिसकी वजह से

तल्‍खी बढ़ने की बात कही जा रही है। इस शक की दूसरी वजह ये भी है कि सऊदी अरब ने चीन और पेइचिंग से

पहले भी मिसाइलें खरीदी हैं। जहां तक अमेरिका से संबंध खराब होने की बात है तो आपको बता दें वह काफी लंबे

समय से सऊदी अरब का रणनीतिक साझेदार रहा है। हाल के कुछ वर्षों में दोनों के संबंधों में और अधिक इजाफा

हुआ है।

लेकिन चीन संबंधी रिपोर्ट सामने आने का असर अब दो तरफा हो सकता है।

यहां ये भी ध्‍यान में रखना होगा कि चीन के साथ अमेरिका के संबंध काफी समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं।

इसमें एक नहीं कई मुद्दे हैं। अब सऊदी अरब का मिसाइल प्रोग्राम इसकी ही एक नई कड़ी बन सकता है।

वहीं दूसरी तरफ जमाल खाशोगी की हत्‍या के मुद्दे पर अमेरिका की सऊदी अरब से नाराजगी किसी से छिपी नहीं है।

वाशिंगटन पोस्‍ट ने कैलिफॉर्निया में मिडलबरी इंस्टिट्यूट ऑफ इंटरनैशनल स्टडीज के मिसाइल एक्सपर्ट जेफरी लुइस के

हवाले से लिखा है कि यमन से बढ़ते संकट को देखते हुए हाल के कुछ समय में सऊदी अरब ने मिसाइलों पर काफी

निवेश किया है।

यमन और ईरान से गहराते संंकट के बीच उसकी रूचि मिसाइलों में बढ़ रही है।

आपको बता दें कि लुईस ने हाल ही में सामने आई से सेटेलाइट इमेज का काफी बारीकि से अध्‍ययन किया है।