गोल्डेन सियार से लेकर तेंदुएं और हिरन की कई वैराइटी देखने को मिलती है माधव नेशनल पार्क में……

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मध्य प्रदेश के शिवपुरी के उत्तर में स्थित माधव नेशनल पार्क, यहां के सबसे पुराने नेशनल पार्क में से एक है। 354 वर्ग किमी में फैला यह पार्क कभी ग्वालियर के राजा के लिए शाही शिकार की जगह हुआ करता था। इस जगह को और भी ज्यादा खूबसूरत बनाने का काम करते हैं यहां मौजूद अनेक प्रकार के पेड़-पौधे, दूर-दूर तक फैले घास के मैदान और उनमें घूमते हुए जंगली-जानवर।

सन् 1958 में मध्य प्रदेश के साथ ही इस नेशनल पार्क को भी स्थापित किया गया था। और 1972 में ‘वन्य जीव अभ्यारण्य’ के तहत इसे और भी ज्यादा सुरक्षित बनाया गया। इस नेशनल पार्क की सबसे बड़ी खासियत है कि ये पूरे साल सैलानियों के लिए खुला रहता है। नेशनल पार्क के अंदर माधव और साख्य सागर दो झीलें हैं जहां सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का डेरा लगता है।

हिरन यहां का खास आकर्षण हैं। छोटे चिंकारे, इंडियन गेजल और चीतल जैसी प्रजातियों को यहां जंगलों में चहलकदमी करते हुए आसानी से देखा जा सकता है। इनके अलावा ब्लैक बग, चार सींग वाले एंटीलॉप, सांभर, नील गाय, स्लॉथ बीयर भी खास हैं।

सख्य सागर में पक्षियों और जानवरों के लिए तैयार किए तालाब में शोव्हेलर, पेलिकन, कॉन्य क्रेनें, स्पुन बिल, बॉल्ड कलहंस जैसे कई प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां देखने को मिलती हैं। अजगर, बंगाल के जहरीले सांप और कोबरा भी इस पार्क में मौजूद हैं। मांसाहारी जंतुओं में सियार, लकड़बग्घा, भेड़िया और कुत्ते आमतौर पर नज़र आ जाते हैं।

पहाड़ों और घास के मैदानों वाली इस जगह पर स्तनधारियों और जंगली जानवरों के साथ-साथ कई वैराइटी के पेड़-पौधे भी हैं। जिनमें धावड़ा, पलाश, खैर, केरधाई और सलाई खास है।