जानें, आखिर वाराणसी से कांग्रेस ने पीएम मोदी के खिलाफ प्रियंका को क्यों नहीं बनाया प्रत्याशी ?

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कांग्रेस ने आखिर अपने ‘तुरुप के इक्‍के’ को बेवजह खर्च होने से बचा लिया। वाराणसी से अजय राय को मैदान में उतार

कांग्रेस अपने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। कांग्रेस ने इरादा किया और कुछ हिम्‍मत भी जुटाई थी, लेकिन आखिर समय

में पैर पीछे खींच लिए। हालांकि, कांग्रेस के थिंक-टैंक इस पक्ष में थे कि प्रियंका गांधी वाराणसी से पीएम मोदी को चुनौती दें।

वे ऐसा अनुमान लगा रहे थे कि प्रियंका यहां बड़ा उलटफेर करने में सक्षम हैं। अगर कांग्रेस प्रियंका को मैदान में उतार देती

, तो परिणाम क्‍या हो सकते थे, इसका अंदाजा प्रधानमंत्री मोदी के वाराणसी में हुए मैगा रोडशो से लग गया होगा।

आखिरकार ये साफ हो गया कि वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रियंका गांधी के बीच मुकाबला नहीं होने जा रहा है।

ऐसी अटकलें लग रही थीं कि प्रियंका गांधी को कांग्रेस चुनावी दंगल में उतार सकती है। इस पर गंभीरता से विचार भी हो

रहा था। प्रियंका के वाराणसी से चुनाव लड़ने के बयान पर कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता अहमद पटेल ने कहा था कि प्रियंका खुद

ही इस बारे में साफ कर दिया है कि अगर पार्टी उनसे कहती है तो वह जरूर लड़ेंगी। जल्द ही पार्टी इस बारे में फैसला

करेगी। कांग्रेस पार्टी इस बारे में अन्य लोगों के साथ सलाह मशविरे के बाद फैसला करेगी। अहमद पटेल ने माना था कि

प्रियंका को चुनाव लड़ाने पर विचार किया जा रहा है।

इधर, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के थिंक-टैंक का अहम हिस्सा, गांधी परिवार के करीबी पार्टी नेता सैम पित्रोदा का मानना था

कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला करती, तो

यह अच्छी बात होगी। उन्‍होंने कुछ दिनों पहले दैनिक जागरण को दिए एक इंटरव्‍यू में कहा था कि सबसे पहले तो यह

प्रियंका गांधी का फैसला होगा। हम अपने विचार बोल सकते हैं। मगर चुनाव लड़ने या नहीं लड़ने का फैसला उन्हें लेना है।

अगर वह चुनाव लड़ने का फैसला करती हैं तो अच्छी बात है। कांग्रेस पार्टी और उसके कार्यकर्ता बेहद उत्साहित होंगे। मैं

आश्वस्त हूं कि देश भी उत्साहित होगा और एक बेहद जबरदस्त मुकाबला देखने को मिलेगा। वाराणसी के लोग उनके लिए

कड़ी मेहनत करेंगे मगर यह निर्णय उनका होगा। पित्रोदा के बयान से साफ जाहिर होता है कि वह भी प्रियंका बनाम मोदी

की चुनावी जंग के पक्ष में थे।

प्रियंका गांधी कांग्रेस पार्टी का बड़ा चेहरा हैं। राजनीति के जानकार उनमें कांग्रेस पार्टी का भविष्‍य देखते हैं। प्रियंका में लोगों

को इंदिरा गांधी का छवि नजर आती है। ऐसे में लोगों को उनसे काफी उम्‍मीदें हैं। अगर प्रियंका गांधी अपने पहले चुनाव में

ही हार जाती हैं, तो लोगों को काफी निराशा होगी। हार के बाद कांग्रेस को तो नुकसान होगा ही, प्रियंका को भी इस हार

के भार से उबरने में लंबा समय लग सकता है।