जानें कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट के समक्ष क्‍या था भारत और पाकिस्‍तान का पक्ष …

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पाकिस्‍तान की जेल में बंद भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव पर बुधवार को अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट (International Court of Justice) अपना फैसला सुनाएगी। 16 जजों की बैंच की मौजूदगी में आईसीजे के अध्‍यक्ष अब्दुलकवी अहमद यूसुफ इस फैसले को पढ़ेंगे। जाधव को पाकिस्‍तान की सैन्‍य अदालत ने आतंकवाद, जासूसी के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई है। 8 मई 2017 को पहली बार भारत ने इस मामले में अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

उस वक्‍त भारत की प्राथमिकता जाधव को मिली फांसी की सजा का स्‍थगन थी। भारत इसमें कामयाब भी रहा और 18 मई 2017 को अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट ने कुलभूषण जाधव (Kulbhushan Jadhav) की सजा के स्‍थगन का आदेश दिया था। इस आदेश में यहां तक कहा गया था कि जब तक आईसीजे इस संबंध में अपना फैसला न सुना दे तब तक पाकिस्‍तान सैन्‍य अदालत द्वारा दी गई सजा को स्‍थगित किया जाए। करीब तीन वर्ष तक चले इस मामले में अब जानते हैं कि दोनों देशों ने अपने पक्ष में क्‍या कहा।

पाकिस्‍तान ने इस मामले में वियना संधि का उल्‍लंघन किया है। पाकिस्‍तान को चाहिए था कि जाधव की गिरफ्तारी से पहले और गिरफ्तारी के तुरंत बाद भारत के काउंसलर अधिकारी को इसकी जानकारी तुरंत दी जानी चाहिए थी।

भारतीय अधिकारी को जाधव से कभी भी मुलाकात की छूट और इजाजत दी जानी चाहिए थी, जो की नहीं दी गई। इसी तरह जाधव को भी इस बात की छूट होनी चाहिए थी कि वह कभी भी अपना पक्ष भारतीय अधिकारियों के समक्ष रख सके।