जानें क्यों लगा 1000 अंक का गोता ,येस बैंक से राणा कपूर की विदाई से सहमा शेयर बाजार ….

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येस बैंक के सीईओ राणा कपूर को हटाने पर आरबीआई के फरमान और कारोबार के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये में आई गिरावट जिम्मेदार है. इंडिया  टुडे के संपादक अंशुमान तिवारी ने बताया कि बाजार को बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में गिरावट की उम्मीद थी.

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर येस बैंक के शेयर्स भारी पड़े. कारोबार के अखिरी घंटों में येस बैंक के शेयरों में 25.90 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई. इसके अलावा अदानी पोर्ट के शेयरों में भी दस फीसदी की  गिरावट दर्ज हुई. इस संकट के चलते बाजार में लगभग दोपहर एक बजे भारी बिकवाली हुई जिससे बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्सलगभग 1000 अंकों से अधिक लुढ़क गया.

इसके अलावा नैशनल स्टॉक एक्सचेंज एनएसई का प्रमुख सूचकांक निफ्टी भी 11,000 के स्तर के नीचे पहुंच गया. रॉयटर्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक इस गिरावट के लिए रिजर्व बैंक द्वारा येस बैंक के सीईओ राणा कपूर को पद से हटाने का फैसला जिम्मेदार बताया जा रहा है.

वहीं इंडिया टुडे के संपादक अंशुमान तिवारी के  मुताबिक बाजार में येस बैंक के शेयरों में गिरावट के साथ-साथ ग्लोबल फॉरेक्स एक्सचेंज में डॉलर के मुकाबले रुपये में दर्ज हुई गिरावट भी जिम्मेदार है. दिन की गिरावट से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोहपर 12.51 बजे डॉलर के मुकाबले रुपया 72 रुपये के स्तर पर पहुंच गया. दिन के कारोबार में रुपया लगभग आधा फीसदी लुढ़का.

बीएसई के सेंसेक्स हीटमैप के मुताबिक इस गिरावट में येस बैंक के शेयरों में गिरावट के साथ-साथ अदानी पोर्ट्स के शेयरों में 10 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई थी, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के शेयरों में 5 फीसदी, टाटा मोटर्स के शेयरों में 4.6 फीसदी और मारुती के शेयर में लगभग 3.5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली.

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इससे पहले गुरुवार को मुहर्रम के मौके पर बंद रहने के बाद शुक्रवार को बाजार ने सुबह के कारोबार में तेज रफ्तार पकड़ी थी. दिन के कारोबार में सेंसेक्स 172 अंक मजबूत होकर खुला था. वहीं, निफ्टी भी 69 अंकों की बढ़त के साथ कारोबार करता देखा गया. लेकिन दोपहर आते-आते सेंसेक्स ने तेज गोता खाया और एक झटके में 1000 अंकों तक गिर गया. हालांकि कुछ मिनटों में इस गिरावट को थाम लिया गया. धीरे-धीरे बाजार सामान्य कारोबार की तरफ बढ़ने लगा.

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विशेषज्ञों की मानें तो भारतीय रिजर्व बैंक के इस फैसले से अन्य निजी बैंक भी चिंतित हो जाएंगे. उन्हें डर है कि ऑरीजनल प्रमोटर्स को अपना नियंत्रण कम करने और उन्हें अपने पद से हटने के लिए भी कहा जा सकता है.