जीवन क्यों है अनमोल उपहार और जानें कैसे नियमित अभ्यास के संकल्प से इसे और सार्थक बनाया जा सकें …

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जन्म लेते ही मिल जाता है यह खूबसूरत उपहार। पल-पल बदलते जीवन के उलझन भरे सवालों के
बीच रहकर भी कुछ लोग इसे अनमोल बना देते हैं। पर ऐसे लोगों की तादाद बेतहाशा बढ़ रही है जो
अचानक किसी पल इस उपहार को नष्ट करने की गलती कर जाते हैं। जाने-माने लाइफ कोच और
योग गुरु ग्रैंडमास्टर अक्षर से सीमा झा ने जाना जीवन क्यों है अनमोल उपहार और कैसे नियमित
अभ्यास के संकल्प से इसे और सुंदर-सार्थक बनाया जा सकता है…

हर सुबह, हर दिन मिलता है जीवन रूपी उपहार। यह सुंदर तरीके से पैक किए गए पैकेट में नहीं
मिलता, न ही इसके लिए आप इंतजार करते हैं। यह अपने आप मिल जाता है। इसलिए शायद हम
अक्सर इसका मोल नहीं समझ पाते। ज्यादातर में इस उपहार को पाने का उल्लास नहीं होता। पर
यदि आप इस उपहार को प्या‍र से ग्रहण करते हैं, इसका हर दिन सदुपयोग करते हैं तो इसका
अर्थ है कि आप देने वाले यानी प्रकृति का सम्मान करते हैं।

आप इसके नियमों को समझते हैं। प्रकृति के नियमों से बाहर यहां कोई नहीं, सब इसके दायरे में
हैं, कोई इसे बदल नहीं सकता। जीवन भी बदलता रहता है, उतार-चढ़ाव के बीच हमें इससे उपजी
एकरसता को भी संभालना है। जाहिर है जीवन को अपने ही हाथों गंवा देने का अर्थ है कि हम प्रकृति
के नियमों पर भरोसा नहीं करते। दरअसल, सिर्फ हमारे चाहने से चीजें नहीं बदलतीं। हमें मन को
लगातार प्रशिक्षित करना होगा ताकि वह जीवन को आनंददायक उपहार बना सके। यदि मन अस्थिर
है, हताश है तो वह जीवन-दृष्टि को भी क्षीण कर देता है। जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती जाती है
और इससे हार मान जाते हैं लोग।