टैक्‍स सेविंग के साथ पाएं शानदार रिटर्न, ELSS को बनाएं निवेश का जरिया ..

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वर्षों से टैक्स-सेविंग म्‍युचुअल फंड यानी ELSS निवेशकों के लिए सबसे अच्छा टैक्स-सेविंग विकल्प साबित
हुए हैं। वैसे तो टैक्स-सेविंग के कई विकल्‍प मौजूद हैं जैसे- नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS), नेशनल सेविंग
सर्टिफिकेट (NSC), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), लेकिन इनके बीच भी इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम
(ELSS) सबसे पसंदीदा टैक्स-सेविंग विकल्प रहे हैं। लंबी अवधि में शानदार रिटर्न और लॉक-इन पीरियड
कम होने की वजह से यह निवेशकों का चहेता रहा है। आज हम उन पांच कारणों की चर्चा करेंगे कि आपको
टैक्‍स सेविंग म्‍युचुअल फंडों में निवेश पर विचार क्‍यों करना चाहिए।

पारंपरिक टैक्स-सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स आम तौर पर लंबी अवधि की लॉक-इन अवधि के साथ आते हैं। पीपीएफ
में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है, वहीं कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और एनपीएस के लिए
व्यक्तियों को रिटायरमेंट तक निवेश करने की आवश्यकता होती है। इसी कड़ी में टैक्स-सेविंग फिक्स
डिपॉजिट में भी कम से कम 5 वर्षों की लॉक-इन अवधि होती है। जब सभी पारंपरिक निवेश विकल्पों
से तुलना करते हैं तो ईएलएसएस फंड्स में सिर्फ तीन वर्ष की न्यूनतम लॉक-इन अवधि होती है। आप
चाहें तो निवेश जारी रख सकते हैं या अपनी निवेश की गई राशि को लॉक-इन अवधि के बाद भुना
सकते हैं।

सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (सिप) म्‍युचुअल फंड्स में निश्चित अंतराल पर निश्चित राशि निवेश करने
का एक अनुशासित तरीका है। सिप उन निवेशकों के लिए उपयुक्त निवेश विकल्प है, जो एक बार में
बड़ी भारी राशि निवेश नहीं करना चाहते। सिप आपको मासिक रूप से कम राशि का निवेश करने की
अनुमति देता है और धारा 80सी के तहत बड़ी राशि निवेश करने वालों की तरह ही टैक्स में छूट का
लाभ भी देता है। साथ ही, सिप में आपको म्‍युचुअल फंड यूनिट्य के खरीद की लागत औसत करने का
लाभ मिलता है। इसका मतलब यह है कि आप मार्केट के उतार-चढ़ाव के मुताबिक अपना जोखिम भी
नियंत्रित कर सकते हैं।