तीन बैंकों के विलय के रास्ते में हैं ये चार प्रमुख चुनौतियां

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सरकार ने बैंक ऑफ बड़ौदा में देना बैंक और विजया बैंक के विलय का निर्णय लिया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इससे बैंक और मजबूत होंगे तथा उनकी कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी. हालांकि, इस विलय के रास्ते में कई चुनौतियां हैं.

तीन साल पहले सरकार ने बैंक ऑफ बड़ौदा में निजी क्षेत्र के कई हाई प्रोफाइल प्रोफेशनल्स की नियुक्ति कर उन्हें बैंक में कायापलट करने का जिम्मा सौंपा था. पिछले तीन साल में इन प्रोफेशनल्स और बैंक कर्मियों की मेहनत से तमाम तरह की अड़चनें दूर कर ली गई हैं. बैंक ऑफ बड़ौदा एक नई उड़ान भरने की तैयारी कर ही रहा था, कि अब सरकार ने उसके साथ देना बैंक और विजया बैंक के विलय की घोषणा कर दी है. हालांकि यह राह इतनी आसान नहीं है.


योजना की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इससे बैंक और मजबूत होंगे तथा उनकी कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी. इस विलय के रास्ते में कई चुनौतियां हैं. आइए ऐसी ही चार प्रमुख चुनौतियों की बात करते हैं.

विलय के बाद जो बैंक बनेगा वह भारतीय स्टेट बैंक के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक हो जाएगा जिसका बहीखाता करीब 10 लाख करोड़ रुपये का होगा. मार्च, 2017 तक एसबीआई का बैलेंस सीट 10 लाख करोड़ रुपये का था. इन दोनों के बाद पीएनबी, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक का स्थान होगा. असल में इस तेजी से बदलती और डिजिटल होती दुनिया में बड़े आकार का कोई खास महत्व नहीं है. बैंकों को लोन की तेज प्रोसेसिंग, जोखिम प्रबंधन, लागत कम करने और शेयरधारकों को बेहतर रिटर्न देने पर ध्यान देना होगा.
विजया बैंक की वजह से विलय के बाद बने बैंक को दक्ष‍िण भारत में भी पहुंच मिल जाएगी. हालांकि बैंक ऑफ बड़ौदा की पहले से राष्ट्रीय पहुंच है. इससे कई ब्रांच में डुप्लीकेशन यानी एक जगह कई ब्रांच होने की स्थ‍िति आ सकती है. तीनों बैंकों में एसेट का पोर्टफोलियो और पोर्टफोलियो की क्वालिटी लगभग एक जैसी ही है. हालांकि, देना बैंक की स्थिति अच्छी नहीं है, उसमें ज्यादा एनपीए, आय की ऊंची लागत और गिरते मुनाफे की चुनौती है. इससे विलय के बाद बने बैंक के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है.

विलय के बाद बने बैंक में टेक्नोलॉजी का इंटीग्रेशन एक बड़ा मसला है. बैंक ऑफ बड़ौदा ने हाल में ही अपनी कोर बैंकिंग टेक्नोलॉजी को ‘फिनाकल 7’ से ‘फिनाकल 10’ में अपग्रेड किया है. यह कई महीने तक चलने वाली कवायद थी. अब तीनों बैंकों को इसी प्लेटफॉर्म में लाना एक बड़ी चुनौती है.

बैंक ऑफ बड़ौदा ने पहले ही बाहर से काफी प्रोफेशनल्स को अपने यहां नियुक्त कर बैंक के कामकाज में बदलाव की कवायद शुरू की है. विजया और देना बैंक में बड़ी संख्या में सीनियर पोजिशन पर लोग हैं. लोन प्रोसेसिंग में बैंक ऑफ बड़ौदा ने जिस तरह की टेक्नोलॉजी और नई क्षमताओं का इस्तेमाल किया है, उसके लिए अलग तरह के और नए तरह के कौशल वाले लोगों की जरूरत होगी. इसलिए दोनों अन्य बैंकों से आने वाले कर्मचारियों को इन कामों में लगाने की जगह संभवत: रिलेशनशिप मैनेजर, मार्केटिंग और सेल्स वर्क जैसे कामों में लगाया जाएगा