दो हजार साल प्राचीन भरतकूप मंदिर का कायाकल्प, राजा छत्रसाल के बाद अब दिल्ली के उद्यमी आगे आए ….

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तकरीबन दो हजार साल पहले बुंदेल शासकों के समय में निर्मित पौराणिक भरतकूप मंदिर जल्द ही नए स्वरूप में नजर आएगा।

मंदिर को पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए काम शुरू हो गया है।

पहली बार राजा छत्रसाल ने मरम्मत कराई थी, अब दिल्ली के उद्योगपति ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

मंदिर को देखने और कूप का जल पीने के लिए प्रतिवर्ष देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

वास्तुशिल्प के आधार पर प्राचीन मंदिर में मकर संक्रांति पर बड़ा मेला लगता है।

भरतकूप मंदिर की पौराणिकता का प्रमाण दीवारों से मिलता है।

वर्षों पुरानी भवन पद्धति से निर्मित मंदिर का गर्भ गृह और जग मोहन गृह पूरी तरह जर्जर है।

मंदिर के द्वार का जीर्णोद्धार अपने समय में राजा छत्रसाल ने कराया था।

उसके बाद किसी को जीर्णोद्धार कराए जाने की जानकारी नहीं है।

चित्रकूट से करीब 15 किलोमीटर दूर भरतकूप मंदिर स्थित है। पास में एक कुआं है।

इसका धार्मिक महत्व गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में बताया है।

जब प्रभु श्रीराम 14 साल के वनवास काल में चित्रकूट पहुंचे तो उनके भाई भरत अयोध्या की जनता के साथ मनाने

के लिए यहां आए थे।

प्रभु का राज्याभिषेक करने के लिए सभी तीर्थों का जल लाए थे।

हालांकि 14 साल तक वन में रहने के लिए दृढ़ निश्चय कर चुके प्रभु नहीं लौटे थे।

इस पर निराश भरत जी सभी तीर्थों का जल और सामग्री कूप में छोड़ प्रभु की खड़ाऊ लेकर लौट गए थे।

इसीलिए उसका नाम भरतकूप पड़ा। मान्यता है कि इसका जल पीने से पेट के सभी रोग दूर हो जाते हैं।