नागरिकता विधेयक के विरोध में कांग्रेस,ममता Vs सीबीआइ के मुद्दे पर ममता Vs सीबीआइ के मुद्दे पर दोनों सदनों में हंगामा, नागरिकता विधेयक के विरोध में कांग्रेसदोनों सदनों में हंगामा…

0
0

कोलकाता में पश्चिम बंगाल पुलिस और सीबीआइ के बीच चल रहे विवाद की गूंज सियासी गलियारों तक पहुंचती हुई

दिखाई दी। अब इस मुद्दे को लेकर संसद में भी हंगामे के आसार हैं। इधर कांग्रेस ने भी राज्‍यसभा के अपने सभी

सदस्‍यों को व्हिप जारी कर दिया है। इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और असम प्रभारी हरीश रावत ने रविवार को

साफ कर दिया था कि पार्टी नागरिकता (संशोधन) विधेयक-2016 का राज्‍यसभा में विरोध करेगी।

आप सांसद संजय सिंह ने सीबीआइ के दुरुपयोग पर चर्चा की मांग करते हुए नियम 267 के तहत राज्यसभा में नोटिस

दिया है।
विश्वविद्यालयों में नए 13 सूत्रीय रोस्टर प्रणाली के विरोध में राजद सांसद जेपी यादव ने लोकसभा में नोटिस दिया है।

दरअसल, चिटफंड घोटाले में कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर पहुंचे सीबीआइ अधिकारियों और पुलिस के

बीच कथित हाथापाई हो गई। पुलिस ने सीबीआइ अधिकारियों को वारंट दिखाने को कहा और उन्हें कमिश्वर आवास के अंदर

जाने से रोक दिया। रात को ममता बनर्जी ने कमान संभाली तो उनके निशाने पर केंद्र की मोदी सरकार रही। विरोध स्‍वरूप

ममता बनर्जी मेट्रो चैनल के पास धरने पर बैठ गईं।खबरों के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को पार्क स्ट्रीट स्थित

घर से सीबीआइ ने हिरासत में लिया। इसके बाद शेक्सपियर सरणी थाने ले जाया गया। विवाद को गर्माता हुआ देखकर

हिरासत में लिए गए सभी 5 अधिकारियों को छोड़ दिया गया। लेकिन ममता अब आरोप लगा रही है

कि सीबीआइ मोदी सरकार के कहने पर ये पूरा खेल कर रही है।

नागरिकता (संशोधन) विधेयक-2016 को लेकर कांग्रेस नेता हरीश रावत ने रविवार को कहा कि अगर सरकार संसद

के मौजूदा सत्र के दौरान राज्यसभा में यह विधेयक लाती है तो उनकी पार्टी इसके विरोध में वोट करेगी।

इस विधेयक को लेकर पूर्वोत्तर में काफी विरोध हो रहा है। रावत ने विधेयक को ‘संविधान, असम समझौते और राष्ट्रीय

सुरक्षा के खिलाफ करार देते हुए यह भी आरोप लगाया कि विधेयक के जरिए भाजपा ‘समाज में अशांति पैदा कर

राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।

गौरतलब है कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक-2016 पिछले शीतकालीन सत्र के दौरान आठ जनवरी को लोकसभा में

पारित हुआ था। इस दौरान कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सदन से वाकआउट किया था। इस प्रस्तावित कानून का मकसद

बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक अत्याचार की वजह से भागकर 31 दिसंबर 2014 तक भारत में आए

हिंदू, सिख, बौद्ध जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को नागरिकता प्रदान करना है। विधेयक के विरोध में इन दिनों

असम और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में प्रदर्शन हो रहा है।