नेहा मारदा,असुरक्षा की भावना से बाहर निकलना होगा

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नेहा मारदा,असुरक्षा की भावना से बाहर निकलना होगा

नेहा कहती हैं, मैं अभी शो करने के मूड में नहीं थी। थोड़ा और ब्रेक चाहती थी। मेरी कुछ संस्थाएं हैं व पटना में नई

प्रतिभाओं के लिए ट्रेनिंग एकेडमी है। इन्हेंं भी थोड़ा और वक्त देना चाहती थी। मैं हमेशा से ही सरस्वतीचंद्र और अफसर

बिटिया जैसे शो के निर्देशक अरविंद बब्बल के साथ काम करना चाहती थी। इसीलिए उनका नाम सुनते ही मैंने बिना

कहानी सुने इस शो के लिए हां कर दिया। मैंने लुक टेस्ट दिया। इससे सभी को विश्वास हो गया कि इस किरदार और भाषा

शैली में मैं फिट दिखूंगी।

बुजर्गों की बात समझी

इस शो में काम करते हुए नेहा को बुजुर्गों की कही एक महत्वपूर्ण बात समझ में आयी। वह बताती हैं, निर्माता इस शो को

एक पारिवारिक ड्रामा मानते हैं, लेकिन मेरी सोच उनसे अलग है। संयुक्त परिवार की अपेक्षा एकल परिवार में रहने वाले

लोग इस कहानी से खुद को ज्यादा अच्छी तरह से जोड़ पाएंगे। इस शो का मुख्य आकर्षण बच्चे हैं, क्योंकि उनके आधार

पर हम उनके माता-पिता के रिश्तों के बीच कट्टी (नाराजगी) और बट्टी (मेल-मिलाप) को दिखाएंगे। पति-पत्नी के बीच

झगड़े को देखकर अक्सर घर के बुजुर्ग कहते हैं कि एक बच्चा पैदा कर लो सब ठीक हो जाएगा। मुझे बुजुर्गों की कही यह

बात समझ में आई। बच्चे पैदा होने के बाद पति-पत्नी का एक-दूसरे को देखने का नजरिया बदल जाता है।