पनडुब्बी की तरह पानी के अंदर जाकर डॉल्फिन की तस्वीरें लेगा ड्रोन …

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चंबल नदी में पाई जाने वाली गेंगेटिक डॉल्फिन की गणना अब ड्रोन कैमरे से की जाएगी।

यह ड्रोन पानी के भीतर डॉल्फिन और दूसरे जलीय जीवों की तस्वीरें लेगा और वीडियो बनाएगा।

इससे जलीय जीवों की सटीक गणना हो पाएगी। राष्ट्रीय घड़ियाल चंबल अभ्यारण्य में पहली बार यह प्रयोग होने जा रहा है।

अभ्यारण्य की टीम की ओर से डॉल्फिन और दूसरे जलीय जीवों की गणना के लिए जो ड्रोन इस्तेमाल किया जा रहा है,

वह नदी की 500 मीटर गहराई में जाकर फोटो और वीडियो बनाने में मदद करेगा। अभ्यारण्य के जिला वन अधिकारी

प्रभुदास गेव्रियल का कहना है कि यह ड्रोन हवा में उड़ने वाले ड्रोन से अलग है।

यह ड्रोन नदी में पनडुब्बी की तरह अंदर ही अंदर जाकर डॉल्फिन और जलीय जीवों की तस्वीरें लेगा।

हवा में उड़ने वाला ड्रोन वायरलेस होता है, लेकिन यह ड्रोन वायर से जुड़ा होगा।

उन्होंने कहा कि ड्रोन की मदद से चंबल अभ्यारण्य के अन्य जलीय जीवों की गणना हो सकती है।

पिछले एक हफ्ते से भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून की टीम अभ्यारण्य के अधिकारियों और कर्मचारियों को ड्रोन

के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दे रही है।

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सीमा में 435 किमी लंबी राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी में करीब 74

डॉल्फिन होने की संभावना है। इनमें से 80 फीसदी डॉल्फिन भिंड क्षेत्र में चंबल अभ्यारण्य के घाटों पर पाई जाती हैं।

चंबल में पाई जाने वाली डॉल्फिन गहरे पानी के पूल में घर बनाती है। यह पूल सबसे ज्यादा भिंड क्षेत्र में चंबल नदी में

पाए जाते हैं। चंबल नदी में 74 गेंगेटिक डॉल्फिन के अलावा विलुप्त हो रही नौ प्रजातियों के कछुए भी हैं, जिनमें चार

अत्यंत दुर्लभ मांसहारी प्रजाति के कछुए हैं। इसके साथ ही 1876 घड़ियाल और 660 मगरमच्छ हैं।

चंबल में पाई जाने वाली डॉल्फिन की आंख नहीं होती है। यह कंपन