पीएफ-पेंशन पैसा IL&FS में फंसा 2000 कंपनियों को होगा 9000 करोड़ का नुकसान

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करीब 2000 कंपनियों के निजी पीएफ और पेंशन का पैसा IL&FS के नॉन-कन्वेर्टिबल डिबेंचर में लगा हुआ है और इस निवेश से करीब 9,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है.

इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनेंशियल सर्विसेज (IL&FS) के डिफाल्ट संकट की आंच अब तमाम सरकारी-गैर सरकारी कंपनियों से जुड़े हजारों कर्मचारियों तक पहुंच गई है. करीब 2000 कंपनियों के निजी पीएफ और पेंशन का पैसा IL&FS के नॉन-कन्वेर्टिबल डिबेंचर में लगा हुआ है और इस निवेश से करीब 9,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है.

इसके पहले कई म्यूचुअल फंडों और बीमा कंपनियों को IL&FS के डिफाल्ट से नुकसान होने की आशंका सामने आई थी. दूसरी तरफ, केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी स्वीकार किया है कि देश का समूचा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी क्षेत्र संकट के मुहाने पर खड़ा है.

बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि योजना के गाइडलाइन के मुताबिक इस निवेश से होने वाला नुकसान कंपनियों को खुद ही वहन करना होगा. असल में निजी पीएफ और पेंशन फंडों के लिए कुछ अलग नियम होते हैं. इन कंपनियों में इंफोसिस, टाटा पावर और ल्यूपिन जैसे दिग्गज भी शामिल हैं.

इनमें फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, भारतीय स्टेट बैंक, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन जैसी सरकारी कंपनियां भी हैं. कई खबरों के अनुसार हाल में वित्त मंत्रालय ने ईपीएफओ से यह जानकारी मांगी है कि उसका IL&FS और इस तरह की कंपनियों में कितना निवेश है.

देश का गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी क्षेत्र आसन्न संकट के मुहाने पर खड़ा है. कुछ बड़ी कंपनियों द्वारा की गई गडबड़ियों और कर्ज की तंगी से इस क्षेत्र के ध्वस्त होने का फार्मूला तैयार हो चुका है. सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात कही.