प्रधानमंत्री किसान योजना: सरकार ने तय की गाइडलाइन, बिना आधार किसानों को नहीं मिलेंगे पैसे

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बीते 1 फरवरी को अंतरिम बजट के दौरान पीयूष गोयल ने किसानों के लिए खास स्‍कीम का ऐलान किया.लेकिन इस स्‍कीम के लिए एक अहम शर्त भी है.

बीते 1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश करते हुए देश के कार्यवाहक वित्‍त मंत्री पीयूष गोयल ने किसानों के लिए ”प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि” योजना का ऐलान किया है. इस योजना के तहत दो हेक्टेयर तक की जोत वाले छोटे किसानों को सालाना 6,000 रुपये की नकद मदद दी जाएगी. लेकिन यह मदद हासिल करने के लिए किसानों के पास आधार होना जरूरी होगा. हालांकि पहली किस्त के लिए आधार नंबर देना अनिवार्य नहीं किया गया है.  बता दें कि पहली किस्‍त के तहत किसानों को दो हजार रुपये की रकम दी जाएगी. इस योजना के तहत किसानों को 31 मार्च तक किस्‍त दे दी जाएगी.

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों को भेजे पत्र में कहा है, पहली किस्त पाने के लिए आधार नंबर होना अनिवार्य नहीं है. इसके वैकल्पिक दस्तावेजों- ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान पत्र नरेगा, रोजगार कार्ड या केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी किसी अन्य पहचान पत्र के आधार पर पहली किस्त दी जा सकती है.

वहीं दूसरी और उसके बाद की किस्त के लिए आधार नंबर अनिवार्य होगा.

पात्र किसानों को दोहराव न हो, इसके लिए कृषि मंत्रालय ने राज्‍य सरकारों को सुनिश्चित करने को कहा है.

राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे गांवों में लाभार्थी छोटे और सीमान्त किसानों का डाटाबेस बनाएं.

राज्यों से ऐसे किसानों का ब्यौरा – नाम, स्त्री हैं या पुरुष, एससी-एसटी, आधार, बैंक खाता संख्या और मोबाइल नंबर जुटाने को कहा है.

बता दें कि केंद्र ने छोटे और सीमान्त किसानों को पति, पत्नी, 18 साल तक के

नाबालिग बच्चों के हिसाब से परिभाषित किया है.

12 करोड़ किसानों को फायदा

मोदी सरकार की इस स्‍कीम का फायदा 12 करोड़ किसानों को होने की उम्‍मीद है.

बीते शुक्रवार को बजट पेश करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि इस योजना

के तहत 2 हेक्टेयर तक भूमि वाले छोटी जोत वाले किसान परिवारों को

6,000 रुपये प्रति वर्ष की दर से डायरेक्‍ट इनकम की मदद दी जाएगी.

यह रकम 2,000 रुपये प्रत्येक की तीन समान किस्तों में लाभान्वित किसानों

के बैंक खातों में सीधे ही ट्रांसफर कर दी जाएगी.

इस कार्यक्रम से लगभग 12 करोड़ छोटे और सीमांत किसान परिवारों के लाभान्वित होने की उम्मीद है.

योजना पर सरकार 75,000 करोड़ रुपये की राशि खर्च कर रही है.

बजट में ऐलान के मुताबिक यह स्‍कीम बीते 1 दिसंबर, 2018 से लागू है.

कहने का मतलब ये है कि 1 दिसंबर 2018 से 31 मार्च, 2019 तक की अवधि के लिए पहली किस्त का इसी वर्ष के दौरान भुगतान कर दिया जाएगा.