बड़ा मौका है, इमरान को इसे गंवाना नहीं चाहिए !

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पूर्व क्रिकेटर इमरान खान दो दिन बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। पाकिस्तानी अवाम उनसे क्या उम्मीदें पाले हुए है? इमरान कैसे पाकिस्तान को विकास के रास्ते पर ला पाएंगे और पड़ोसी भारत के साथ रिश्तों में आई खटास को दूर कर पाएंगे? इन्हीं सवालों को लेकर रमेश ठाकुर ने पाकिस्तान के प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता और पूर्व मानवाधिकार मंत्री अंसार बर्नी से बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश…

बतौर प्रधानमंत्री इमरान खान का स्वागत कर रहे हैं आप?
जनाब स्वागत तो लंगड़े दूल्हे का भी किया जाता है। इमरान खान अब मुल्क के हुकूमतदार हैं तो पाकिस्तानी होनेके नाते हम उनका स्वागत करते हैं।

जीत की पहली प्रतिक्रिया में इमरान खान ने चीन के कसीदे पढ़कर हिंदुस्तान को कमतर आंकने की कोशिश की। इसे आप कैसे देखते हैं?
भारत के साथ संबंधों को लेकर पाकिस्तान के नेता जैसे पहले करते आए थे, इमरान भी उन्हीं के पदचिन्हों पर चलेंगे, इसकी तस्वीर उन्होंने अपनी पहली टिप्पणी में दर्शा दी है। लेकिन मुझे लगता है कि दोनों मुल्कों को परस्पर संबंध, व्यापारिक आदान-प्रदान, ओपन बॉर्डर के बाबत बात करने की दरकार है। सियासी कटुता को भूलकर मधुरता की नींव रखनी चाहिए। फिलहाल इन बातों को इमरान आगे बढ़ाएंगे, इसकी मुझे उम्मीद कम लगती है। लेकिन भारत-पाक के पास एक-दूसरे पर आंखें तरेरने का वक्त नहीं है। दोनों मुल्कों में अमन-शांति की बहाली होनी चाहिए। इमरान को आगे बढ़कर दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहिए।

मुल्क के भीतर सियासी अस्थिरता की खाई को क्या पाट पाएंगे इमरान खान?इंशा अल्लाह ऐसा कर पाएं! देखिए, सब कुछ एकदम दुरुस्त हो जाएगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन हां, मुल्क में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के उदय से वंशवाद और रसूख की राजनीति से कुछ हद तक छुटकारा जरूर मिला है। कुछ तुर्रम खांओं ने पाकिस्तान को अपनी जागीर समझ लिया था।

पीएम हाउस में न रहने और हर चीज में पारदर्शिता लाने की बात में कितना वजन पाते हैं?
उनकी बातें सुनकर हमें आप लोगों के केजरीवाल याद आ गए। पाकिस्तानियों की दूसरे मुल्कों के मुकाबले भारतीय खबरों पर सबसे ज्यादा नजरें रहती हैं। इमरान खान अगर ऐसा करते हैं तो बहुत अच्छा होगा। लेकिन सादगी से जीवन जीने की अदा उनमें हमने कभी देखी नहीं। इस्लामाबाद स्थित उनके आलीशान आवास में हर सुविधा मौजूद है। वह बादशाहों की तरह जीवन जीते हैं। नवाबों जैसे शौक हैं उनके। मुझे नहीं लगता वह सादगी से जीवन जी पाएंगे। लेकिन वह कैसे भी रहें, फर्क नहीं पड़ता। सरकारी कामों में अगर पारदर्शिता लाते हैं तो बड़ी बात होगी।

भारत-पाक के बीच तनातनी वाले माहौल में आपसी संबंधों को कैसे आगे बढ़ाएंगे?
तल्खियां भूलकर दोनों मुल्कों को नई सुबह का स्वागत करना चाहिए। मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि इमरान खान को नई दोस्ती की पहल खुद आगे बढ़कर भारत के लिए करनी चाहिए। उनको नरेंद्र मोदी को सबसे पहले पाकिस्तान आने का न्यौता देना चाहिए। अगर आपकी चीन के साथ पटरी खा रही है तो उसमें कोई दिक्कत नहीं। लेकिन भारत से कटुता को भी मिटाना चाहिए। हो सकता है दोनों देशों की दुश्मनी दूर करने के लिए खुदा ने आपका ही चुनाव किया हो। ऐसा मौका इमरान खान को नहीं गंवाना चाहिए।

चुनावी रैलियों में इमरान खान ने नरेंद्र मोदी को जमकर कोसा था। कैसे आंख मिला पाएंगे मोदी से?
देखिए, इन बातों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। चुनाव जीतने के बाद नेताओं के लिए कड़वे बोल ज्यादा मायने नहीं रखते। देख लेना जल्द ही इमरान खान दिल्ली में और नरेंद्र मोदी इस्लामाबाद में एक साथ डिनर करते दिखाई देंगे।