भारत के पास मौजूद हैं 11 Guided Missile Destroyer, समुद्री सुरक्षा में निभाते हैं अहम रोल …

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आईएनएस रंजीत (INS Ranjit) 36 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत हो रहा है।

आईएनएस रंजीत भले ही किसी तरह के युद्ध में शामिल न रहा हो, लेकिन समुद्री सीमाओं की रक्षा के

मामले में इसका लोहा दुनिया मानती हैं।

भारत के पास वर्तमान में कोलकाता, दिल्‍ली और राजपूत श्रेणी के करीब 11 गाइडेड मिसाइल डेस्‍ट्रॉयर

(Guided Missile Destroyer) हैं।

इनमें कोलकाता श्रेणी के (Guided Missile Destroyer) हैं।

इनमें कोलकाता श्रेणीडेस्‍ट्रॉयर सबसे बड़े हैं।

भारत में पहली बार दिल्‍ली क्‍लास के विध्‍वंसक पोत बनाए गए थे।

समुद्री सुरक्षा हो या जंग का मैदान सभी जगह इन विध्‍वंसक पोत की भूमिका बेहद खास होती है।

आईएनएस रंजीत को 29 जून 1977 में तत्‍कालीन सोवियत संघ के राज्‍य यूक्रेन के कोमुनारा शिपबिल्डिंग

प्‍लांट (Kommunara Shipbuilding Plant) में बनाया गया था।

प्रोजेक्‍ट 61एमजेड के तहत बने इस एंटी सबमरीन शिप को 16 मई 1977 को पोराझायुश्चि (Porazhayushchy)

नाम दिया गया था।

नाटो की लिस्‍ट में इसे काशिन क्‍लास डेस्‍ट्रॉयर (Kashin-class destroyer) कहा जाता है।

16 जून 1979 को इसे लॉन्‍च किया गया और 30 अक्‍टूबर 1981 को इसे सोवियत संघ की नौसेना में शामिल किया गया।

7 जून 1983 को इसको वेकल्पिक व्‍यवस्‍था के तहत काला सागर में तैनात किया गया।

यहीं से इसको 24 नवंबर 1983 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया था।

भारतीय नौसेना में इसको नया नाम दिया जो था ‘आईएनएस रंजीत’।

3950 टन वजनी राजपूत क्‍लास के इस डेस्‍ट्रॉयर की सबसे बड़ी खासियत थी कि यह गाइडेड मिसाइल डेस्‍ट्रॉयर था।

तरह से लोडेड होने के बाद इसका वजन करीब 4974 टन होता था।

चार गैस टरबाइन इंजन और इसमें लगे दो शेफ्ट इसको करीब 72 हजार हॉर्स पावर की ताकत देते थे,

जिसके बाद यह 35 नॉट्स या 65 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से समुद्र की लहरों को चीरता हुआ आगे बढ़ जाता था।

नौसेना की परिभाषा में डेस्‍ट्रॉयर अकेले नहीं होते बल्कि ज्‍यादातर यह अपनी तरह के अन्‍य जहाजों या फ्लीट के साथ

पानी का सीना चीरते हुए आगे बढ़ते हैं।

लॉन्‍ग डिस्‍टेंस वारशिप के लिए बनाए गए ये डेस्‍ट्रॉयर किसी भी समुद्री हमले को नाकाम करने के लिए नजदीक से

दुश्‍मन पर भीषण गोलाबारी कर उसको नष्‍ट करने का काम करते हैं।

इसके अलावा इनका दूसरा काम बड़े युद्धपोत या विमानवाहक युद्धपोतों की रक्षा और उनके लिए रास्‍ता साफ

करना भी होता है।

जहां तक भारत की बात है तो वर्तमान में भारत के पास 17 डेस्‍ट्रॉयर हैं।

इनमें से 11 गाइडेड मिसाइल से लैस हैं।

यह कोलकाता, दिल्‍ली और राजपूत क्‍लास की श्रेणी के हैं।