भारत, नॉर्वे में आतंक से लड़ाई और UNSC जैसे मुद्दों पर बनी सहमति, संबंधों को मजबूती देने पर जोर

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नॉर्वे की प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग ने कहा कि भारत और पाकिस्तान बगैर किसी बाहरी मदद के खुद ही द्विपक्षीय तनावों को कम कर सकते हैं

नॉर्वे की प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग और उनके भारतीय समकक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी किया.

इसमें पीएम मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्वे ने कई मुद्दों पर सहमति जताते हुए एक साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है.

जिन मुद्दों पर सहमति बनी उनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, मल्टी लैटरल एक्सपोर्ट कंट्रोल रिजिम और आतंकवाद अहम हैं.

इससे पहले सोलबर्ग ने कहा कि भारत और पाकिस्तान बड़े देश हैं और वे बगैर किसी बाहरी मदद के खुद ही द्विपक्षीय तनावों को कम कर सकते हैं.

दिल्ली में नार्वे के दूतावास में एक नए हरित परिसर का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान यह बात कही.

संघर्षों को सुलझाने की नॉर्वे की पृष्ठभूमि को ध्यान

में रखते हुए सोलबर्ग से पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नॉर्वे ने विवादों के शांतिपूर्ण निपटारे के लिए मध्यस्थ के रूप में काफी काम किए हैं,

लेकिन उनकी सरकार की स्पष्ट नीति रही है कि किसी के मदद मांगने पर ही उसकी मदद की जाए.

उन्होंने कहा कि कोई भी बाहरी (व्यक्ति/देश) शांति नहीं ला सकता, ना ही बदलाव कर सकता है.

उन्होंने कहा कि अगर व्यापक वार्ता के लिए भारत और पाकिस्तान में कोई गतिविधि हो रही है तो अन्य देश मदद कर सकते हैं लेकिन उसकी प्रक्रिया वार्ता के साझेदार देश ही तय करेंगे.

भारत में नियुक्त नॉर्वे के राजदूत निल्स रैगनर काम्सवाग ने बाद में

एक ट्वीट में यह स्पष्ट किया कि सोलबर्ग ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थ बनने की पेशकश नहीं की है.जब सोलबर्ग से यह पूछा गया कि