भारत ही नहीं बल्कि इस देश में अपना अगला जन्‍म लेना चाहते थे जॉर्ज फर्नांडिस

0
1

जॉर्ज फर्नांडिस हमारे बीच नहीं रहे, वह 88 साल के थे। पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने एक बार कहा था कि अगर

पुनर्जन्म जैसी कोई चीज है तो मैं दोबारा वियतनाम में जन्म लेना चाहूंगा। जॉर्ज ने अपने जीवन काल में संघवादी,

कृषिविद, राजनीतिक कार्यकर्ता और पत्रकार के रूप में विशेष भूमिकाएं अदा की।

बेंगलुरु में करीब 15 वर्ष पहले ‘कर्नाटक प्लांटर्स एसोसिएशन’ के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए फर्नांडिस ने

वियतनाम के लोगों को अनुशासित, प्रतिबद्ध और दृढ़ संकल्पी बताया था। उन्होंने कहा था कि वियतनाम का दुनिया के

कॉफी बाजार में बड़ा हिस्सा है। उन्होंने कहा था, ‘मुझे इससे कोई ईर्ष्या नहीं है। मैं वियतनाम का प्रशंसक हूं और तेज

प्रगति के लिये दक्षिण पूर्व एशियाई देश और उसके लोगों की प्रशंसा करता हूं।’

फर्नांडिस ने कहा था, ‘अगर पुनर्जन्म जैसी कोई चीज है, तो मैं वियतनाम में जन्म लेना चाहूंगा। वे अपनी प्रतिबद्धताओं के

लिए जान न्योछावर करने को तत्पर रहते हैं।’ वियतनाम का दौरा करने वाले फर्नांडिस पहले रक्षा मंत्री थे।

उनका जन्म मंगलौर में हुआ था।

जॉर्ज फर्नांडिस का व्‍यक्‍तित्‍व बहुआयामी था। वे एक जबरदस्‍त ट्रेड यूनियनिस्‍ट, र्निभीक पत्रकार और राजनीतिज्ञ थे। जॉर्ज फर्नांडिस भारत के पूर्व रक्षामंत्री रह चुके हैं। भारतीय संसद की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार जॉर्ज फर्नांडिस का जन्म मंगलौर में 3 जून 1930 को हुआ।

उनकी मां किंग जॉर्ज फिफ्थ की बहुत बड़ी प्रशंक थीं और उनका जन्‍मदिन भी तीन जून था, इसीलिए उन्‍होंने अपने छह बच्‍चों में सबसे बड़े बेट का नाम जॉर्ज रखा। इन्होंने 21 जुलार्इ 1971 में लीला कबीर से विवाह किया था।

जॉर्ज ने अपने जीवन काल में संघवादी, कृषिविद, राजनीतिक कार्यकर्ता और पत्रकार के रूप में विशेष भूमिकाएं अदा की। बहुत कम लोग जानते हैं कि राजनीति के मैदान में उतरने से पहले उन्‍होंने प्रीस्‍ट बनने का बकायदा प्रशिक्षण लिया था।