मेष लग्न में मंगली दोष कारण और निवारण वैज्ञानिक दृष्टिकोण

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उपरोक्त चित्र मे जहा प्रथम भाव लिखा है उसे लग्न भी कहतै है

अपनी कुंडली मैं जाने मंगल दोष है या नही इसके लिए हमारी पिछली पोस्ट पढ़े

मांगलिक दोष वैज्ञानिक द्रष्टिकोण कारण औऱ निवारण

मेष लग्न अथवा मेष राशि से मंगली दोष विचार और वैज्ञानिक निवारण


मेष राशि नाम अक्षर
अ, ल, चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, आ

अग्नि तत्व
स्वामी मंगल (मेष और वृश्चिक राशि)
जातक ओजस्वी, दबंग, साहसी, और दॄढ इच्छाशक्ति वाला

पहले भाव से मांगलिक विचार या कारण

मंगल पहले (लग्नेश) और आठवे भाव का स्वामी होता है | लग्नेश होने की वजह से मंगल यहाँ  शुभ गृह माना जाता है, यहाँ मंगल प्रथम भाव में है और सातवीं दृष्टि से सप्तम भाव को देखता है लेकिन लग्नेश होने के कारण मंगली दोष  भंग हो जाता है

चौथे भाव से मांगलिक विचार या कारण

चौथे भाव मै यहाँ मंगल अपनी नीच राशि कर्क में होता है यहाँ मंगल अशुभ हो जाता हैं और  अपनी चौथी दृष्टि से सातवें भाव को देखता हैं तो उसे भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करता हैं । इस प्रकार  मंगल चौथे भाव में हो तो मांगलिक दोष बनता है ।

सातवें भाव से मांगलिक विचार या कारण

सातवें भाव में मंगल यहाँ  शुभ गृह होने और केंद्र में स्थित होने पर मंगल दोष हल्का होता है

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आठवें भाव से मांगलिक विचार या कारण

आठवें भाव में मंगल अपनी  वृश्चिक राशि  मे होता है ऐसी स्थिति में मांगलिक दोष नहीं बनता ।

बारहवें भाव से मांगलिक विचार या कारण

बारहवें भाव का मंगल यहाँ  मीन राशि में होता है  बारहवां भाव त्रिक भाव  होता है, यहां से  मंगल अशुभ दृष्टि से कुंडली के सातवें भाव को देखता है इसलिए  मांगलिक दोष होता है

इस प्रकार  मेष लग्न की कुंडली में मंगल लग्न से चौथे, सातवें और बारहवें भाव में स्थित हो तो मांगलिक दोष बनाता है ।

पहले,और आठवे भाव में स्थित होने पर मांगलिक दोष नहीं होता है

वैज्ञानिक निवारण   :
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का नित्य पाठ करे ,
हर माह कम से कम 1 बार दंपति माता दुर्गा  के मंदिर मैं अबश्य जाए ,
कन्याओं को मिठाई खिलाएं,
दंपति बुजुर्गों का नित्य चरण स्पृश करे और आशीर्वाद ले,
मधुर वाणी और  धैर्य के साथ व्यवहार करे ,
विधवा स्त्री की सहायता करें,
कर्ज न ले ओर कर्ज न दे ,
शराब न पिये ,
झूठ कभी न बोलें,
चांदी की बिना जोड़ का छल्ला अनामिका उंगली मे  धारण करें,
कुत्तों , बंदरो ,मछलियों और चिड़ियों को मीठा खिलाये ,

अन्य ज्योतिष मंगली दोष निवारण उपाय

1. जातक की कुंडली में शुभ ग्रहों का केंद्र में होना,
शुक्र द्वितीय भाव में हो,
गुरु मंगल साथ हों या मंगल पर गुरु की दृष्टि हो तो मांगलिक दोष भंग या ख़त्म हो जाता है

2. वर-कन्या की कुंडली में आपस में मांगलिक दोष की काट- जैसे एक के मांगलिक स्थान में मंगल हो और दूसरे के इन्हीं स्थानों में सूर्य, शनि, राहू, केतु में से कोई एक ग्रह हो तो दोष नष्ट हो जाता है।

3. कुंडली में मंगल यदि स्व-राशि (मेष, वृश्चिक), मूलत्रिकोण, उच्चराशि (मकर), मित्र राशि (सिंह, धनु, मीन) में हो तो मंगल दोष नहीं रहता है।

4. शनि, मंगल या कोई भी पाप ग्रह जैसे राहु, सूर्य, केतु अगर मांगलिक भावों (1,4,7,8,12) में कन्या जातक के हों और उन्हीं भावों में वर के भी हों तो मंगल दोष नष्ट होता है। यानी यदि एक कुंडली में मांगलिक स्थान में मंगल हो तथा दूसरे की में इन्हीं स्थानों में शनि, सूर्य, मंगल, राहु, केतु में से कोई एक ग्रह हो तो उस दोष को काटता है।

5. कन्या की कुंडली में गुरू यदि केंद्र या त्रिकोण में हो तो मांगलिक दोष नहीं लगता अपितु उसके सुख-सौभाग्य को बढ़ाने वाला होता है।

6. यदि एक कुंडली मांगलिक हो और दूसरे की कुंडली के 3, 6 या 11वें भाव में से किसी भाव में राहु, मंगल या शनि में से कोई ग्रह हो तो मांगलिक दोष नष्ट हो जाता है।

7. कुंडली के 1,4,7,8,12वें भाव में मंगल यदि चर राशि मेष, कर्क, तुला और मकर में हो तो भी मांगलिक दोष नहीं लगता है।

8.वर की कुण्डली में मंगल जिस भाव में बैठकर मंगली दोष बनाता हो कन्या की कुण्डली में उसी भाव में सूर्य, शनि अथवा राहु हो तो मंगल दोष का शमन हो जाता है।

नोट : सावित्री जैसी पत्नि अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से छुड़ा लाई वो भी वरदान के साथ
और राम जैसा पति अपनी पत्नी सीता को छुड़ा लाये रावण जैसे राक्षस से वो भी सोने की लंका को जीत कर
अगर वर और कन्या ऐसे पति और पत्नी बन जाए तो मंगल दोष कितना बड़ा क्यों न हो उनका कुछ भी नही बिगाड सकता
अंतिम सार लेखन का ये है समाज मैं फैली भ्रांति का निराकरण करे और  हम अपने विवाह योग्य पुत्र या पुत्री को
उचित समय पर विवाह निर्भय होकर करे ताकि अगली पीढ़ी स्वस्थ और बुद्धिमान उत्पन्न हो

लेखक
श्री मनोज कुमार गुप्ता
आधुनिक एवं वैज्ञानिक ज्योतिषी लेखक
नई दिल्ली
ईमेल: mkg.moon@gmail.com