मोहब्बत का जुनूनः पाक की जेल में बिताए 2 हजार 232 दिन

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नफरत की बुनियाद पर खींची गई हिंदुस्तान और पाकिस्तान की सरहद की लकीरों

के इस पार और उस पार अब भी मोहब्बत के फूल खिलते हैं.

मगर मोहब्बत से नफरत करने वालों को ये ना तब गवारा था और

ना अब गवारा है. इसीलिए वो आशिक को भी जासूस का चोला पहना देते हैं.

मुंबई के एक नौजवान को इंटरनेट पर चैटिंग के दौरान एक लड़की से प्यार हो जाता है.

बाद में पता चलता है कि लड़की पाकिस्तानी है.

वीज़ा मिलता नहीं तो लड़का बिना वीजा के ही अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान पहुंच जाता है.

मगर पाकिस्तान की सरज़मीन पर अभी उसने कदम रखा ही था कि

फिर कब वो आशिक से जासूस बना दिया गया खुद उसे भी पता नहीं चला.

एक आवाज़ सरहद के उस पार की थी और एक आवाज़ सरहद के इस पार की.

दोनों ने प्यार से एक दूसरे को आवाज़ दी तो दिलों की सरहदों की तमाम लकीरें मिट गई.

प्यार कब होता है. क्यों होता है. कैसे होता है. कहां होता है. किसी को नहीं मालूम.

फिर ये सरहदों को कहां मानने वाला था. नहीं माना. और बस यहीं प्यार खता कर बैठा.

कमबख्त, वो दिल और मुल्क की सरहद को एक मान बैठा.

अंजाम ये हुआ कि उसकी जिंदगी के बेशकीमती छह साल उससे छीन लिए गए.

अगर किसी की मोहबब्त किसी की तोहमत बना दी जाए.

किसी के प्यार में पड़ जाने वाले किसी आशिक को जासूस करार दे दिया जाए.

और फिर पूरे छह साल तक वो आशिक की बजाए भारतीय खुफिया एजेंसी

के एजेंट के तौर पर जेल की सलाखों के पीछे कैद रहे.

तो वो क्या उसका पूरा खानदान मोहब्बत से तौबा कर लेगा.