म्‍यांमार में लोकतंत्र की हत्‍या पर आखिर क्‍यों नरम पड़ा यूएन। सुरक्षा परिषद ने आखिर सैन्‍य तख्‍तापलट कहने से भी क्‍यों किया गुरेज। उम्‍मीद की जा रही थी कि यूएन म्‍यांमार में सेना के खिलाफ कठोर कदम उठाएगा लेकिन महाशक्तियों की सियासत के कारण ऐसा नहीं हो सका।

0
2

संयुक्‍त राष्‍ट्र में महाशक्तियों के बीच सियसात के कारण संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में म्‍यांमार में सैन्‍य तख्‍तापलट
के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई का मामल टल गया। सुरक्षा परिषद की बैठक में गुरुवार को म्‍यांमार में सैन्‍य
तख्‍तापलट शब्‍द का नाम लिए बगैर आंग सांग सू की और अन्‍य नेताओं की रिहाई की मांग की गई। परिषद में
म्‍यांमार में सैन्‍य तख्‍तापलट के बजाए केवल आपातकाल पर चिंता व्‍यक्‍त की गई। सुरक्षा परिषद में कहा गया कि
म्‍यांमार की सेना ने वहां हुए चुनाव में धोखाधड़ी के कारण सेना प्रमुख ने सत्‍ता अपने हाथ में ले ली और एक साल
के लिए आपातकाल की घोषणा की है।

संयुक्‍त राष्‍ट्र का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने एक दिन पूर्व यह कहा था कि म्‍यांमार में सैन्‍य
तख्‍तापलट हुआ है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा था कि म्‍यांमार के पूरे राजनीतिक परिदृष्‍य पर अवलोकन और
आकलन के बाद अमेरिका इस नतीजे पर पहुंचा है। इसके पूर्व अमेरिका में बाइडन प्रशासन ने म्‍यांमार में हुए सैन्‍य तख्‍तापलट के बाद प्रतिबंधों की बात कही थी। खुद संयुक्‍त राष्‍ट्र ने सभी विकसित देशों से म्‍यांमार में सैन्‍य तख्‍तापलट
के विरोध में आगे आने के लिए कहा था। सवाल यह है कि फ‍िर ऐसा क्‍या हुआ कि संयुक्‍त राष्‍ट्र म्‍यांमार के तख्‍तापलट
पर उदार हो गया।