विक्रम बख्शी को मिला 4 हफ्ते का समय, क्‍या सुलझेगा हुडको से विवाद?

0
0

अमेरिका की चर्चित फूड चेन मैकडॉनल्ड्स से समझौते से पहले विक्रम बख्‍शी को हुडको से सेटलमेंट करनी होगी. इसके लिए विक्रम बख्‍शी को 4 हफ्ते का समय मिला है.

अमेरिका की चर्चित फूड चेन मैकडॉनल्ड्स के भारत में एमडी विक्रम बख्शी को

सार्वजनिक क्षेत्र की आवास एवं शहरी विकास निगम (हुडको) से चार सप्‍ताह में विवाद सुलझाने का समय मिला है.

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण ( NCLAT) ने विक्रम बख्‍शी को यह मौका दिया है.

एनसीएलएटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की

अगुवाई वाली दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि बख्शी के पास हुडको से विवाद निपटाने का यह आखिरी मौका है.

एनसीएलएटी की पीठ ने बख्शी को यह भी निर्देश दिया है कि वह उसके समक्ष हलफनामा दायर कर इस घटनाक्रम पर रिपोर्ट दें.

बता दें कि अमेरिका की फास्ट फूड चेन मैकडॉनल्ड्स और बख्शी ने अपने विवाद को निपटाने के लिए एनसीएलएटी में एक दूसरे के खिलाफ मामला वापस लेने की घोषणा की थी.

इस समझौते पर आपत्ति जताते हुए हुडको ने NCLAT में याचिका दायर कर दी.

हुडको का कहना है कि मैकडॉनल्ड के साथ सौदा पूरा होने से पहले उसका 195 करोड़

रुपये का बकाया मिलना चाहिए.

विक्रम बख्शी के वकील ने क्‍या कहा?

सुनवाई के दौरान बख्शी की ओर से उपस्थित अधिवक्ता अमित सिब्बल ने एनसीएलएटी से

कहा कि उन्होंने हुडको को पहले ही 66 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है और जमीन भी उसके कब्जे में है.

उन्होंने कहा कि हुडको के कब्जे में पहले से 300 करोड़ रुपये मूल्य की 4.65 एकड़ संपत्ति है.

सिब्बल ने कहा कि बख्शी ने कर्ज वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) के पास 10 करोड़ रुपये जमा कराए हैं.

सिब्‍बल के मुताबिक डीआरटी का आदेश अड़चन से अधिक कुछ नहीं है

क्योंकि वह पहले ही आदेशानुसार भुगतान कर चुके हैं.

क्‍या था मैकडॉनल्ड्स और विक्रम बक्शी का विवाद?

मैकडॉनल्ड्स और विक्रम बख्शी ने 1995 में एक समझौता किया था.

यह समझौता भारत में अमेरिका की इस फास्ट फूड कंपनी के स्‍टोर यानी बिक्री केंद्र खोलने के बारे में किया गया.

यह समझौता 25 साल के अवधि के लिए किया गया.

इसके बाद दोनों ने मिलकर कनाट प्लाजा रेस्टारेंट लिमिटेड (सीपीआरएल) नाम से एक ज्‍वाइंटर वेंचर बनाया.

इसमें दोनों की बराबर-बराबर हिस्‍सेदारी थी.

विक्रम बख्शी और मैकडॉनल्ड्स के बीच विवाद पहली बार साल 2008 में सामने आया था,

जब मैकडॉनल्ड्स ने सीपीआरएल में बख्शी की 50 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की कोशिश की थी.

यह मामला दुनिया की निगाहों में तब आया जब 2013 में बख्‍शी को सीपीआरएल के प्रबंध निदेशक के पद से हटा दिया गया.