शायरी

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आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या,
क्या बताऊँ कि मेरे दिल में हैं अरमाँ क्या क्या,
ग़म अज़ीज़ों का हसीनों की जुदाई देखी,
देखें दिखलाए अभी गर्दिश-ए-दौराँ क्या क्या।